गया जिले के खिजरसराय में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इस हाई-टेक प्रौद्योगिकी केंद्र की स्थापना पर कुल ₹170 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जो बिहार के औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केंद्र छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और उद्यमियों को तकनीकी कौशल और विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करेगा, जिससे वे आधुनिक बाजार की चुनौतियों का सामना कर सकें।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला 15 जून, 2026 को केंद्रीय MSME मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संयुक्त रूप से रखी थी। यह पहल भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' दृष्टिकोण का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश को आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है। MSME, यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, वे छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय होते हैं जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। ये लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और उत्पादों तथा सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करते हैं। यह केंद्र इन उद्यमों को नई तकनीकों और उन्नत प्रशिक्षण से लैस करेगा, जिससे वे अपनी उत्पादन गुणवत्ता और दक्षता में सुधार कर सकें और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफलतापूर्वक खड़े हो सकें।
बिहार सरकार द्वारा खिजरसराय में 20 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिस पर यह केंद्र बनाया जा रहा है। इस सुविधा का कुल निर्मित क्षेत्र लगभग 16,800 वर्ग मीटर होगा। यह विशाल परिसर आधुनिक मशीनरी, प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित होगा, जो MSME क्षेत्र के श्रमिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों को नवीनतम औद्योगिक तकनीकों जैसे कि उन्नत विनिर्माण, डिजाइनिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और डिजिटल कौशल में प्रशिक्षित करेगा। यह प्रशिक्षण उन्हें अपने उत्पादों और सेवाओं को बेहतर बनाने, लागत कम करने और बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने में सक्षम बनाएगा।
इस प्रौद्योगिकी केंद्र से गया और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। यह स्थानीय युवाओं को कौशल विकास के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा, जिससे उन्हें बेहतर रोजगार मिल सकेगा या वे अपने स्वयं के उद्यम शुरू कर सकेंगे। यह केंद्र न केवल बिहार में विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा और नए निवेश आकर्षित करेगा। यह परियोजना बिहार के औद्योगिक परिदृश्य में एक मील का पत्थर साबित होगी, जो राज्य को आत्मनिर्भरता और आर्थिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि बिहार के छोटे व्यवसायी भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
