बिहार सरकार ने नई नीति के तहत चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और गन्ने की खेती बढ़ाने के प्रयास तेज किए

ThisNews Desk
बिहार सरकार ने नई नीति के तहत चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और गन्ने की खेती बढ़ाने के प्रयास तेज किए
चित्र: alexandre saraiva carniato / Pexels

बिहार सरकार ने 2026 में राज्य में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने और बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। यह महत्वपूर्ण कदम हाल ही में शुरू की गई "बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026" के तहत उठाया गया है। यह नीति, जिसे 25 जून, 2026 को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था और इसके तुरंत बाद प्रभावी हो गई, का उद्देश्य राज्य भर में नौ निष्क्रिय चीनी मिलों को पुनर्जीवित करना और 25 नई चीनी मिलें स्थापित करना है।

छोटे व्यवसाय मालिकों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए यह नीति कई नए अवसर लेकर आई है। जब सरकार चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और नई मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखती है, तो इसका सीधा मतलब है कि गन्ने की मांग में वृद्धि होगी। इससे गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार और मूल्य मिलने की संभावना है, जिससे उनकी आय बढ़ेगी।

नई और पुनर्जीवित होने वाली चीनी मिलें स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ठेकेदारों के लिए, मिलों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के साथ-साथ विभिन्न आपूर्ति श्रृंखला कार्यों में नए अनुबंध के अवसर पैदा होंगे। इसमें भवन निर्माण, मशीनरी की स्थापना और परिवहन से संबंधित कार्य शामिल हो सकते हैं।

व्यापारियों के लिए, गन्ने की खरीद-बिक्री, चीनी और उसके उप-उत्पादों के व्यापार, और मिलों के संचालन के लिए आवश्यक अन्य सामग्रियों की आपूर्ति में वृद्धि होगी। यह स्थानीय बाजारों में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। उद्यमियों के लिए, मिलों के आसपास सहायक उद्योगों और सेवाओं की स्थापना के अवसर खुलेंगे। उदाहरण के लिए, परिवहन सेवाएं, पैकेजिंग इकाइयाँ, कृषि उपकरण आपूर्ति और रखरखाव सेवाएं, और अन्य छोटे व्यवसाय जो चीनी उद्योग की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।

यह नीति न केवल औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। जब मिलें चालू होंगी, तो उन्हें कुशल और अकुशल दोनों तरह के श्रमिकों की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। यह बिहार के कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय में सुधार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का यह प्रयास राज्य में चीनी उद्योग को फिर से पटरी पर लाने और इसे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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