बिहार में बाढ़ से 49 लाख लोग प्रभावित, 579 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी

ThisNews Desk
बिहार में बाढ़ से 49 लाख लोग प्रभावित, 579 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी
चित्र: Lâm Trần / Pexels

सितंबर 2026 में बिहार गंभीर बाढ़ की चपेट में है, जिससे 15 जिलों में लगभग 49 से 50 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) को पार कर गई है, जिससे निचले इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा सहित अन्य प्रमुख नदियाँ भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

बिहार सरकार राहत कार्यों में सक्रिय रूप से लगी हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी लगातार बाढ़ राहत अभियानों की निगरानी कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग इस संकट को प्रबंधित करने वाले प्रमुख सरकारी निकाय हैं। केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक केंद्रीय टीम के साथ नुकसान का आकलन करने के लिए बिहार का दौरा किया।

अब तक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 8,27,472 बाढ़ प्रभावित परिवारों को ₹579.23 करोड़ की राहत राशि सीधे हस्तांतरित की है, जिसमें प्रत्येक परिवार को ₹7,000 मिले हैं। केले और मक्के सहित 55,000 हेक्टेयर भूमि पर फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं। सरकार ने 13 राहत शिविर और 1,000 से अधिक सामुदायिक रसोई स्थापित की हैं, साथ ही बचाव और राहत कार्यों के लिए लगभग 1,800 नावें तैनात की गई हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने 37 टीमें तैनात की हैं, और 171 चिकित्सा शिविर संचालित हैं। स्थानीय मीडिया ने बाढ़ से 20 मौतों की सूचना दी है। राज्य सरकार ने बाढ़ आपदा प्रबंधन, 2026 के लिए एक अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है।

यह चल रहा बाढ़ संकट बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs - छोटे और मझोले व्यापार), व्यापारियों (सामान खरीदने और बेचने वाले लोग), श्रमिकों और उद्यमियों (अपना व्यवसाय शुरू करने वाले लोग) को काफी प्रभावित कर रहा है। बाढ़ से कृषि को भारी नुकसान हो रहा है, जिससे फसलें, खेत और पशुधन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, जिसका सीधा असर ग्रामीण आय पर पड़ता है। सड़कों और पुलों सहित बुनियादी ढाँचा (जैसे सड़कें और पुल) क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं (किसी उत्पाद को बनाने से लेकर ग्राहक तक पहुँचाने की पूरी प्रक्रिया) के लिए महत्वपूर्ण परिवहन और कनेक्टिविटी बाधित हो रही है। छोटे व्यवसायों और कृषि श्रमिकों को आजीविका (कमाई का ज़रिया) में गंभीर व्यवधान और आय का नुकसान हो रहा है।

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