बिहार सरकार राज्य में छोटे खाद्य व्यवसायों और उद्यमिता को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। इसके लिए कई सरकारी योजनाएं वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान कर रही हैं। इन पहलों से छोटे उद्यमियों को अपना व्यवसाय स्थापित करने और विस्तार करने में मदद मिल रही है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना एक महत्वपूर्ण केंद्रीय योजना है, जिसे वित्तीय वर्ष 2021 में ₹10,000 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था और इसे 30 सितंबर, 2026 तक बढ़ा दिया गया था। यह योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मशीनरी और प्लांट स्थापित करने की लागत को कवर करने के लिए 35% क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी प्रदान करती है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹10 लाख है। क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी का अर्थ है कि यह सब्सिडी बैंक से लिए गए ऋण से जुड़ी होती है, जिससे उद्यमियों पर वित्तीय बोझ कम होता है। इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों को छोटे उपकरण और दैनिक खर्चों के लिए प्रति सदस्य ₹40,000 की प्रारंभिक पूंजी (सीड कैपिटल) मिल सकती है। बिहार में उद्योग विभाग इस योजना के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
इसके पूरक के रूप में, बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना युवाओं, महिलाओं और वंचित श्रेणियों के व्यक्तियों को अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस सहायता में ₹5 लाख का ऋण शामिल है, जिसे सात वर्षों में लचीली शर्तों पर चुकाया जा सकता है, और ₹5 लाख का अनुदान या सब्सिडी है जिसे वापस करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस योजना के लिए पात्र होने के लिए, आवेदकों को बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए, कम से कम 12वीं पास होना चाहिए और उनकी आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है। यह योजना 54 से अधिक प्रकार के उद्योगों का समर्थन करती है, जिसमें आटा, सत्तू, बेसन, मसाले, नमकीन, जैम, जेली, सॉस, नूडल्स, पापड़, अचार, मुरब्बा, फलों के रस और मिठाइयों जैसी विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ शामिल हैं। वर्ष 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन 25 फरवरी से 15 मार्च, 2026 तक खुले थे।
ये योजनाएं बिहार में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने और छोटे व्यवसायों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
