बिहार में कमजोर मानसून और वज्रपात से दोहरी चुनौती: कृषि पर असर, सरकार की तैयारी

ThisNews Desk
बिहार में कमजोर मानसून और वज्रपात से दोहरी चुनौती: कृषि पर असर, सरकार की तैयारी
चित्र: ZhengXun Lin / Pexels

बिहार में 2026 का मानसून सीजन कमजोर रहा है, जिससे राज्य को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है: सामान्य से कम बारिश और वज्रपात (बिजली गिरने) से होने वाली मौतें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 13 जुलाई, 2026 तक बिहार के 38 में से 95% जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई थी, और कुल मिलाकर 46% की कमी थी। यह भारत के लिए पिछले 126 वर्षों में पांचवां सबसे सूखा जून-जुलाई का दौर रहा है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर 24% कम बारिश हुई है। अल नीनो की स्थिति को इस कमजोर मानसून का मुख्य कारण माना जा रहा है, जिससे मानसून के दूसरे भाग (जुलाई-सितंबर) में बारिश कम होने की आशंका है।

वज्रपात की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। अगस्त 2026 में, बांका, लखीसराय और पटना जिलों में 24 घंटे के भीतर कम से कम नौ लोगों की जान चली गई। इससे पहले मई और जून 2026 में भी खगड़िया, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, भागलपुर सहित कई जिलों में वज्रपात से मौतें हुई थीं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया है। यह राशि सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को दी जाने वाली तत्काल वित्तीय सहायता है।

राज्य सरकार, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) और जल संसाधन विभाग के माध्यम से, आपदा तैयारियों को मजबूत कर रही है। जल संसाधन विभाग ने 31 अक्टूबर, 2026 तक बाढ़ सुरक्षा कार्यों में लगे इंजीनियरों और अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। BSDMA प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और सामुदायिक-आधारित आपदा प्रतिक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 2026 में 10,000 से अधिक युवाओं को "युवा आपदा मित्र" के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिससे स्वयंसेवकों की संख्या 19,000 से अधिक हो गई है। ये स्वयंसेवक बाढ़ और वज्रपात जैसी आपदाओं में सहायता करते हैं। BSDMA 'गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना' भी शुरू करने की योजना बना रहा है और 20 नए जिला आपातकालीन प्रतिक्रिया सुविधा-सह-प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर रहा है। 'सचेत ऐप' का उपयोग आपदा पूर्व चेतावनियों के लिए किया जा रहा है।

बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा 3 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत 2026-27 के बजट में राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के लिए 1,721 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। हालांकि, समग्र राज्य बजट में जल संसाधन और आपदा प्रबंधन के लिए आवंटन में कमी देखी गई है, जिससे वार्षिक बाढ़ चुनौतियों के बीच नियंत्रण उपायों पर असर पड़ सकता है।

कमजोर मानसून और वज्रपात का बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों और उद्यमियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। बारिश की कमी ने कृषि को बुरी तरह प्रभावित किया है, खासकर धान की खेती को। 10 जुलाई, 2026 तक खरीफ की बुवाई पिछले साल की तुलना में 16% कम थी। इससे किसानों की आय और ग्रामीण क्रय शक्ति (खरीदने की क्षमता) सीधे प्रभावित होती है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं, ट्रैक्टरों और दोपहिया वाहनों की मांग कम हो जाती है। किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ने और शून्य जुताई जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार "सात निश्चय-3" जैसी योजनाओं के माध्यम से औद्योगीकरण, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन कृषि संकट एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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