बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और नए निवेशों को आकर्षित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की घोषणा की है। इस निर्णय के तहत, अब अन्य राज्यों से "छोआ" (पशु आहार, यानी जानवरों के चारे में उपयोग होने वाला शीरा या खोई का एक उप-उत्पाद) और मेथेनॉल (एक प्रकार का रसायन जो पेंट, रसायन और विनिर्माण जैसे उद्योगों में एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है) का आयात किया जा सकेगा। यह कदम बिहार के पशु चारा और रासायनिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, जिससे इन उद्योगों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इसी कड़ी में, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग औद्योगिक उपयोग के लिए मेथेनॉल के आयात और राज्य के भीतर व बाहर इसके परिवहन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रहा है। यह एसओपी, जो जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होने की उम्मीद है, पेंट, रसायन और विनिर्माण जैसे उद्योगों को बड़ी राहत प्रदान करेगी। इन उद्योगों को 2016 में राज्य में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से मेथेनॉल जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायनों की खरीद में लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनके संचालन और विस्तार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।
इसके अतिरिक्त, बिहार सरकार राज्य में उत्पादित एथेनॉल को बिहार के बाहर गैर-पेट्रोलियम उद्योगों को आपूर्ति करने की भी अनुमति देने जा रही है। यह प्रस्ताव वर्तमान में वित्त विभाग की मंजूरी और उसके बाद राज्य कैबिनेट की अंतिम हरी झंडी का इंतजार कर रहा है। इस नीति के तहत, यह सुनिश्चित करने के लिए कि एथेनॉल का दुरुपयोग शराब उत्पादन में न हो, इसे 12 विशिष्ट घटकों के साथ "विकृत" (denatured) करना अनिवार्य होगा। विकृतिकरण का अर्थ है कि एथेनॉल को इस तरह से बदला जाएगा कि वह पीने योग्य न रहे, लेकिन औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त बना रहे। यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार में एथेनॉल का उत्पादन तेल विपणन कंपनियों (OMCs) – वे कंपनियाँ जो पेट्रोल और डीज़ल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद और बिक्री करती हैं – की खरीद क्षमता से काफी अधिक हो गया है। इस अतिरिक्त उत्पादन के कारण कई एथेनॉल संयंत्रों पर वित्तीय दबाव पड़ रहा था, जिसे यह नई नीति कम करने में सहायक होगी। इन सभी नीतिगत बदलावों को लागू करने में विभिन्न सरकारी विभाग सक्रिय रूप से शामिल हैं।
