बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से 2026 में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल और नीतिगत पहल की हैं। इन कदमों का सीधा लाभ छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों को मिलेगा।
प्रशासनिक फेरबदल और नेतृत्व परिवर्तन:
मई 2026 में, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों का एक बड़ा फेरबदल हुआ। 17 मई को, के. सेंथिल कुमार को श्रम संसाधन और प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया, साथ ही उन्हें पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी मिला। धर्मेंद्र सिंह को गन्ना उद्योग विभाग का सचिव बनाया गया।
जुलाई 2026 (लगभग 10-11 जुलाई) में भी प्रशासनिक सेवा (IAS और BAS) अधिकारियों के स्थानांतरण हुए। मनोज कुमार को उद्योग विभाग में अपर सचिव के रूप में स्थानांतरित किया गया, जबकि विदु भूषण चौधरी भी उद्योग विभाग में अपर सचिव बने। सारा अशरफ को उद्योग विभाग के भीतर खाद्य प्रसंस्करण निदेशक नियुक्त किया गया। इन परिवर्तनों का उद्देश्य शासन को मजबूत करना, प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना और विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में तेजी लाना है।
राजनीतिक नेतृत्व में भी बदलाव हुए। 8 मई, 2026 को हुए कैबिनेट विस्तार में अरुण शंकर प्रसाद को नया श्रम, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री बनाया गया, जबकि संजय कुमार को गन्ना उद्योग मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया।
नई MSME नीति और औद्योगिक बुनियादी ढांचा:
राज्य सरकार एक नई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) नीति पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। बिहार उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार MSME निदेशालय के पुनर्गठन के लिए चर्चाओं का नेतृत्व कर रहे हैं। इस पहल का लक्ष्य बिहार के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाना, निवेश में तेजी लाना और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना है। MSME का अर्थ छोटे व्यवसाय हैं, जिनमें कम पूंजी वाले उद्योग शामिल होते हैं।
औद्योगिक बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण निवेश 15 जून, 2026 को हुआ, जब गया के खिजरसराय में ₹170 करोड़ की लागत से MSME प्रौद्योगिकी केंद्र की आधारशिला रखी गई। केंद्रीय MSME मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसका उद्घाटन किया। यह केंद्र सालाना 7,000 व्यक्तियों को प्रशिक्षित करेगा और उपकरण सेवाओं (जैसे मशीनरी का उपयोग) और जॉब वर्क (छोटे उत्पादन कार्य) के माध्यम से 1,000 से अधिक स्थानीय MSME को सहायता प्रदान करेगा। 2026 में ही पटना के बिहटा में ₹171 करोड़ का एक और MSME प्रौद्योगिकी केंद्र खोला गया, साथ ही मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर में चार विस्तार केंद्र भी स्थापित किए गए।
व्यवसायों के लिए प्रोत्साहन और रोजगार लक्ष्य:
राज्य सरकार ने औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज भी प्रदान किया था, जिसकी आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2026 थी। इस पैकेज में मुफ्त भूमि आवंटन, ₹40 करोड़ तक का ब्याज सबवेंशन (सरकार द्वारा ब्याज का एक हिस्सा वहन करना) और परियोजना लागत के 30% तक पूंजीगत सब्सिडी (निवेश के लिए सरकारी सहायता) जैसे प्रोत्साहन शामिल थे, जिसका उद्देश्य निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना था। बिहार सरकार ने 2026 में 150,000 सरकारी नौकरियां और अन्य रोजगार प्रदान करने का लक्ष्य भी रखा है। ये सभी कदम बिहार के व्यवसायों और उद्यमियों के लिए एक मजबूत और सहायक वातावरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
