गया जी में 6 हजार करोड़ रुपये का स्टील प्लांट लगेगा, उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच एमओयू

ThisNews Desk(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 2:00 pm बजे)
गया जी में 6 हजार करोड़ रुपये का स्टील प्लांट लगेगा, उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच एमओयू
चित्र: Emmanuel Codden / Pexels

बिहार के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गुरुवार, 30 जुलाई, 2026 को बिहार उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत, बिहार के गया जी जिले में एक बड़ा एकीकृत इस्पात संयंत्र (Integrated Steel Plant – ISP) स्थापित किया जाएगा। यह हस्ताक्षर समारोह पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सरकारी आवास 'संकल्प' सभागार में संपन्न हुआ।

प्रस्तावित एकीकृत इस्पात संयंत्र में शुरुआती तौर पर ₹6,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 1.0 से 1.5 मिलियन टन (MTPA) होने का अनुमान है। एक एकीकृत इस्पात संयंत्र का अर्थ है एक ऐसी व्यापक सुविधा जहां कच्चे माल से लेकर तैयार इस्पात तक की सभी प्रक्रियाएं एक ही स्थान पर पूरी की जाएंगी। यह संयंत्र गया-डोभी रोड औद्योगिक गलियारे में स्थापित किया जाएगा।

इस परियोजना से बिहार की अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों का अनुमान है कि यह संयंत्र स्थानीय लोगों के लिए बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगा। इसके साथ ही, यह परियोजना सहायक और छोटे पैमाने के उद्योगों (MSMEs) को भी बढ़ावा देगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA), उद्योग विभाग और निवेशक के समन्वित प्रयासों से यह परियोजना निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी हो जाएगी।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार और उद्योग विभाग के निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता सहित कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे। महाशक्ति ग्रुप की ओर से अनमोल लोढ़ा और विष्णु नाथ भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

यह निवेश बिहार सरकार के निवेशक-अनुकूल माहौल बनाने के प्रयासों के अनुरूप है, जिसमें बेहतर बुनियादी ढांचा, पारदर्शी नीतियां और त्वरित प्रशासनिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसका लक्ष्य बिहार को केवल एक उपभोक्ता राज्य से बदलकर एक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

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