अगस्त 2026 के अंत में, नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण गंडक नदी प्रणाली में भारी जल-वृद्धि हुई, जिससे बिहार में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इस संभावित आपदा को टालने में पश्चिम चंपारण जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित 60 साल पुराने वाल्मीकिनगर गंडक बराज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
असाधारण जल प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए। 27 अगस्त, 2026 को जल-निर्वहन लगभग 1.50 लाख क्यूसेक (150,000 क्यूसेक) के चरम पर पहुंच गया था। इस नियंत्रित जल-निकासी, बिहार के तटबंधों के नेटवर्क और निरंतर निगरानी के कारण उत्तरी बिहार के कई जिलों में व्यापक विनाशकारी बाढ़ को रोका जा सका।
बिहार जल संसाधन विभाग, बिहार आपदा प्रबंधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग ने स्थिति को संभालने में सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह और आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा सहित अधिकारियों ने पूरी प्रतिक्रिया की निगरानी की। उच्च अलर्ट जारी किए गए और पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर और सीतामढ़ी जैसे संवेदनशील जिलों से 4,000 से 5,000 से अधिक लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसके अतिरिक्त, कोसी नदी में बढ़ते जल स्तर के कारण कोसी बराज के भी 20 गेट खोले गए, हालांकि वहां जल-वृद्धि सामान्य मानी गई। 28-29 अगस्त तक, तत्काल बाढ़ का खतरा काफी हद तक कम हो गया था और गंडक बराज में जल स्तर स्थिर हो गया था।
बिहार सरकार ने बाढ़ प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण धनराशि आवंटित की है। 2020 से जून 2026 तक, 216 मृदा अपरदन नियंत्रण कार्यों पर 447.36 करोड़ रुपये और बाढ़ राहत पर 5,100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं, जिसमें अकेले 2026 में लगभग 450 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। केंद्र ने बिहार के लिए 1900 करोड़ रुपये की लागत वाली दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य कमला बलान पर एक बराज का निर्माण और सारण तटबंध की मरम्मत करना है।
यह प्रभावी बाढ़ प्रबंधन बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। व्यापक बाढ़ को रोकने से कृषि भूमि और फसलों की सुरक्षा होती है, जो इस कृषि प्रधान राज्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे किसानों के लिए आय के बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। यह सड़कों और पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (सड़कें, पुल, आदि) की भी रक्षा करता है, जिससे परिवहन और व्यापार निर्बाध रूप से जारी रहते हैं। यह छोटे व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और व्यापारियों के लिए आवश्यक है। बाढ़ के प्रभाव को कम करके, राज्य श्रमिकों और उद्यमियों के बड़े पैमाने पर विस्थापन से बचता है, जिससे आजीविका के नुकसान और संबंधित आर्थिक और सामाजिक संकट कम होते हैं।
