पटना नगर निगम ने ₹555.32 करोड़ के अनुबंध पर कचरा प्रबंधन का निजीकरण किया

ThisNews Desk
पटना नगर निगम ने ₹555.32 करोड़ के अनुबंध पर कचरा प्रबंधन का निजीकरण किया
चित्र: Phát Trương / Pexels

पटना नगर निगम (PMC) ने अपनी सफाई व्यवस्था के एक बड़े हिस्से का निजीकरण करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। लगभग ₹555.32 करोड़ के चार वर्षीय अनुबंध पर एक निजी एजेंसी को एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Integrated Solid Waste Management) का कार्य सौंपा गया है। यह घोषणा 9 अगस्त, 2026 के आसपास की गई। इस कदम का उद्देश्य पटना में स्वच्छता में सुधार लाना है।

इस नए समझौते के तहत, निजी एजेंसी पटना के सभी 75 वार्डों में व्यापक सफाई सेवाओं के लिए जिम्मेदार होगी। इसमें घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से गीले, सूखे और दो अन्य श्रेणियों में अलग किए गए कचरे का घर-घर संग्रह शामिल है। एजेंसी सड़कों की सफाई भी करेगी और इन कार्यों के लिए ई-रिक्शा, हाथगाड़ी और ट्रैक्टर जैसे आवश्यक संसाधनों का प्रबंधन भी करेगी। एकत्रित कचरे को कचरा स्थानांतरण स्टेशनों (Garbage Transfer Stations - GTS) और फिर प्रसंस्करण स्थलों तक ले जाया जाएगा, जिसमें रामचक बैरिया डंपिंग यार्ड भी शामिल है, जहाँ भविष्य में एक कचरा-से-ऊर्जा संयंत्र (Waste-to-Energy plant) प्रस्तावित है। पटना नगर निगम की भूमिका मुख्य रूप से निजी कंपनी के संचालन की निगरानी और देखरेख तक सीमित हो जाएगी।

यह निर्णय पटना में स्वच्छता कर्मचारियों की हालिया 7-8 दिवसीय हड़ताल के बाद आया है, जो 6 अगस्त, 2026 के आसपास समाप्त हुई थी। हड़ताल तब समाप्त हुई जब पटना नगर निगम और सरकार दैनिक और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर विचार करने, उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों के वेतन को सीधे बैंक हस्तांतरण के माध्यम से भुगतान करने के साथ-साथ बोनस देने की तीन प्रमुख मांगों पर सहमत हुए। 7 अगस्त, 2026 तक, घर-घर कचरा संग्रह फिर से शुरू हो गया था और जमा हुए कचरे को साफ करने के लिए एक विशेष स्वच्छता अभियान चल रहा था।

यह निजीकरण बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। पटना के व्यवसायों और व्यापारियों के लिए, बेहतर स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से शहरी वातावरण में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय वाणिज्य बढ़ सकता है और राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षणों में पटना की रैंकिंग में सुधार हो सकता है। श्रमिकों के लिए, विशेष रूप से मौजूदा स्वच्छता कर्मचारियों के लिए, निजीकरण के इस कदम ने नौकरी की सुरक्षा और काम करने की स्थिति के बारे में चिंताएँ बढ़ाई थीं। हालांकि, सरकार का उनकी नियमितीकरण और उचित मुआवजे की मांगों को पूरा करने का समझौता इन चिंताओं को कम करने का लक्ष्य रखता है। उद्यमियों के लिए, ₹555.32 करोड़ का यह अनुबंध एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक अवसर प्रस्तुत करता है।

इस प्रक्रिया में पटना नगर निगम और बिहार सरकार का नगर विकास एवं आवास विभाग शामिल हैं। महापौर सीता साहू, नगर आयुक्त यशपाल मीणा और नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा जैसे अधिकारियों ने संबंधित चर्चाओं और निर्णयों में भाग लिया है।

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