बिहार के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक हॉस्टलों में अब जीविका दीदियां संभालेंगी मेस

ThisNews Desk
बिहार के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक हॉस्टलों में अब जीविका दीदियां संभालेंगी मेस
चित्र: fishshoto / Pexels

बिहार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की है जिसके तहत राज्य के सभी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों के छात्रावासों में मेस का प्रबंधन अब जीविका दीदियों द्वारा किया जाएगा। यह निर्णय 7 सितंबर, 2026 को प्रकाशित किया गया है और इसका उद्देश्य इन संस्थानों में भोजन की गुणवत्ता और समग्र मेस प्रबंधन में सुधार लाना है।

यह कदम पिछले दो से तीन महीनों में कई तकनीकी परिसरों, जिनमें मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) भी शामिल है, में घटिया भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्रों के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के सीधे जवाब में उठाया गया है। विभाग ने इस संबंध में सभी सरकारी तकनीकी संस्थानों के प्राचार्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

इस पहल में जीविका दीदियां शामिल हैं, जो बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (BRLPS), जिसे आमतौर पर जीविका के नाम से जाना जाता है, से जुड़ी महिलाएं हैं। जीविका दीदियां स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups - SHGs) का हिस्सा होती हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को छोटे-छोटे उद्यम शुरू करने और अपनी आजीविका कमाने में मदद करते हैं। इन समूहों का विभिन्न अस्पतालों और अन्य सरकारी प्रतिष्ठानों में "दीदी की रसोई" (Didi's Kitchen) का सफलतापूर्वक संचालन करने का एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड है, जो बड़े पैमाने पर सामुदायिक रसोई का प्रबंधन करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।

हालांकि इस विशेष पहल के लिए विशिष्ट निवेश आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन इस निर्णय से पूरे बिहार में स्थानीय महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे न केवल छात्रों को पौष्टिक और स्वच्छ, घर जैसा भोजन मिलेगा, बल्कि छात्रों की शिकायतों के एक सामान्य स्रोत को संबोधित करके छात्रावासों के भीतर शांतिपूर्ण माहौल भी बनेगा।

जीविका दीदियों के लिए जिम्मेदारियों का यह विस्तार जमीनी स्तर पर विकास और महिला सशक्तिकरण के लिए बिहार सरकार की जीविका मॉडल पर निरंतर निर्भरता को रेखांकित करता है। यह जीविका समूहों की भूमिकाओं में और विविधता लाता है, जो पहले से ही विभिन्न आजीविका गतिविधियों और सेवाओं में शामिल हैं, जिनमें कुछ क्षेत्रों में ग्रामीण ई-पंजीकरण भी शामिल है। यह पहल बिहार के श्रमिकों और उद्यमियों, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें आर्थिक जुड़ाव के नए रास्ते प्रदान करती है और सार्वजनिक सेवा वितरण में उनकी भूमिका को मजबूत करती है। इसका उद्देश्य छात्रों के रहने की स्थिति में सुधार करना भी है, जिससे राज्य के शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिलेगा।

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