अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 10वें इंडिया इंटरनेशनल फुटवियर फेयर (IIFF) 2026 में बिहार के मुजफ्फरपुर मेगा लेदर फुटवियर एंड एक्सेसरीज पार्क के लिए ₹125 करोड़ के महत्वपूर्ण निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेशों से राज्य के फुटवियर और चमड़ा क्षेत्र में लगभग 1,800 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इस आयोजन के दौरान, लेहर फुटवियर प्राइवेट लिमिटेड ने ₹100 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए, जिससे लगभग 1,500 प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होने की संभावना है। वहीं, पटना लेदर गारमेंट को ₹25 करोड़ का निवेश मिला है, जिससे लगभग 300 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बिहार के उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह और उद्योग सचिव कुंदन कुमार, जो बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) के प्रबंध निदेशक भी हैं, ने इस मेले में मुजफ्फरपुर पार्क की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उद्यमियों को लीज पर औद्योगिक भूखंड और 'प्लग-एंड-प्ले' सुविधाएं (यानी, तैयार बुनियादी ढांचा जहां व्यवसाय तुरंत काम शुरू कर सकते हैं) प्रदान करने की बात कही।
मुजफ्फरपुर का यह मेगा लेदर पार्क, जो महुआल, मोतीपुर में स्थित है, बिहार के चमड़ा क्षेत्र को मजबूत करने और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजना है। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) द्वारा 'ग्रीनफील्ड क्लस्टर' (यानी, बिल्कुल नए सिरे से विकसित औद्योगिक क्षेत्र) के रूप में विकसित किया जा रहा यह पार्क, भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा इंडियन फुटवियर एंड लेदर डेवलपमेंट प्रोग्राम (IFLDP) 2021-26 के तहत अनुमोदित है।
लगभग ₹140 करोड़ के निवेश से 62.17 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहे इस पार्क में 24 शेडों में उत्पादन गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। बुनियादी ढांचे का विकास अभी भी जारी है, जिसमें 19 जून, 2024 को क्लस्टर में एक बहुमंजिला इमारत के निर्माण के लिए निविदा (टेंडर) जारी की गई थी।
यह मेगा पार्क बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका लक्ष्य हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना है। 1,000 से अधिक जीविका दीदियों को पहले ही इस लेदर क्लस्टर के माध्यम से रोजगार मिल चुका है। यह पहल चमड़ा क्षेत्र के उद्यमियों, निर्माताओं और श्रमिकों को विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा, जिसमें सामान्य सुविधा केंद्र और प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं, प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ने, उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार होने और स्थानीय निर्माताओं को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिससे "मेड इन बिहार" चमड़ा उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। राज्य की बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (वस्त्र एवं चमड़ा) 2022 भी इस विकास को समर्थन देती है, जो निवेश आकर्षित करने और एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए पूंजी सब्सिडी (सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता), राज्य-जीएसटी प्रतिपूर्ति (राज्य-जीएसटी की वापसी), ब्याज सबवेंशन (ब्याज दर में छूट), और बिजली शुल्क सब्सिडी (बिजली बिल में छूट) जैसे प्रोत्साहन प्रदान करती है।
