बिहार के सीतामढ़ी-रक्सौल रेल खंड पर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास होने जा रहा है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को पूर्वी मध्य रेलवे, समस्तीपुर मंडल द्वारा सीतामढ़ी-रक्सौल रेल लाइन के 41.04 किलोमीटर लंबे खंड के दोहरीकरण के लिए ₹358.97 करोड़ का इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) अनुबंध मिला है। इस राशि में 18% वस्तु एवं सेवा कर (GST) शामिल है। RVNL को यह लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LoA) 28 जुलाई, 2026 को प्राप्त हुआ।
यह परियोजना कुंडावा चैनपुर (छोड़कर) और रक्सौल (छोड़कर) के बीच के खंड पर केंद्रित है। EPC अनुबंध का अर्थ है कि RVNL इस परियोजना के डिजाइन (इंजीनियरिंग), आवश्यक सामग्री की खरीद (प्रोक्योरमेंट) और निर्माण (कंस्ट्रक्शन) सहित सभी पहलुओं के लिए जिम्मेदार होगा। कार्यक्षेत्र में मिट्टी का काम, ब्लैंकेटिंग, छोटे और बड़े पुलों का निर्माण, स्टेशन और अन्य इमारतें, प्लेटफॉर्म का काम और लेवल क्रॉसिंग का काम, साथ ही अन्य विविध रेलवे बुनियादी ढांचा गतिविधियां शामिल हैं। नई रेल लाइन 25-टन भारतीय रेलवे मानक लोडिंग आवश्यकताओं के अनुरूप बनाई जाएगी, जिसका मतलब है कि यह भारी मालगाड़ियों को सुरक्षित रूप से संभालने में सक्षम होगी। इस परियोजना को पूरा करने की अवधि 1,095 दिन है, जो अनुबंध दिए जाने की तारीख से लगभग तीन साल है।
यह दोहरीकरण पहल बिहार में रेलवे बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के व्यापक प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने सितंबर 2026 में एक बड़ी परियोजना को मंजूरी दी थी, जिसमें नरकटियागंज-रक्सौल-सीतामढ़ी-दरभंगा और सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर खंडों का दोहरीकरण शामिल है। इस बड़ी पहल के लिए दो रेलवे परियोजनाओं की अनुमानित लागत ₹6,798 करोड़ है, जिसमें से बिहार के हिस्से के लिए ₹4,453 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इस वृहद परियोजना से लगभग 87 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
सीतामढ़ी-रक्सौल रेल लाइन दोहरीकरण का बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण महत्व है। रेल लाइन के दोहरीकरण से रेलवे की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, परिचालन दक्षता में सुधार होगा और भीड़ कम होगी, जिससे यात्री और मालगाड़ियों दोनों की आवाजाही सुगम होगी। यह बेहतर कनेक्टिविटी नेपाल, पूर्वोत्तर भारत और सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। बिहार में व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और व्यापारियों के लिए, यह परियोजना कृषि उत्पादों, उर्वरकों, कोयले, लौह अयस्क, स्टील और सीमेंट जैसी आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को सुव्यवस्थित करेगी। क्षमता वृद्धि से प्रति वर्ष 31 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई होने की उम्मीद है। निर्माण गतिविधियों से क्षेत्र में श्रमिकों और उद्यमियों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
