पटना, बिहार। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार कैबिनेट ने 12 अक्टूबर, 2026 को पटना में 23 एजेंडा प्रस्तावों को मंज़ूरी दी। इन प्रस्तावों में राज्य के आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बिहार के विकास में केंद्र सरकार के सहयोग की भी सराहना की।
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रमुख आर्थिक और विकासात्मक परियोजनाओं में दो बिजली अवसंरचना परियोजनाएँ शामिल हैं, जिनकी लागत क्रमशः ₹51.07 करोड़ और ₹575.36 करोड़ है। दूसरी परियोजना में राज्य की इक्विटी ₹115.07 करोड़ और वित्तीय संस्थानों से ₹460.29 करोड़ का ऋण शामिल है। इसके अतिरिक्त, दो बड़ी ग्रामीण पेयजल योजनाओं को भी मंज़ूरी दी गई है: मुंगेर ज़िले के लिए ₹279.51 करोड़ और वैशाली ज़िले के लिए ₹506.71 करोड़। कैबिनेट ने दरभंगा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स पार्क और कार्गो हब के लिए 49.9973 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को भी मंज़ूरी दी, जिसके लिए ₹225.91 करोड़ का मुआवज़ा स्वीकृत किया गया है। लॉजिस्टिक्स पार्क एक ऐसा केंद्र होता है जहाँ सामानों को संग्रहीत, छाँटा और वितरित किया जाता है, जिससे व्यापार और परिवहन अधिक कुशल बनते हैं। कार्गो हब हवाई माल ढुलाई को संभालने का एक केंद्रीय बिंदु है। खगड़िया ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक के लिए ₹75 करोड़ का अनुदान और बिहार राज्य सहकारी बैंक तथा उसके सहयोगियों के लिए साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र हेतु ₹66.11 करोड़ से अधिक की राशि भी स्वीकृत की गई है। सहकारी बैंक ऐसे बैंक होते हैं जो अपने सदस्यों के लाभ के लिए काम करते हैं और अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
इससे पहले, 8 अक्टूबर, 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार MSME नीति 2026 का शुभारंभ किया और सभी ज़िलों में MSME केंद्र का उद्घाटन किया। MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय होते हैं जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं और रोज़गार पैदा करते हैं। सरकार का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में एक करोड़ परिवारों को उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 45,000 उद्यमियों को ₹3,500 करोड़ के परिव्यय के साथ सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना में अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों से 14,000, अत्यंत पिछड़ा वर्ग से 10,000, महिलाओं से 9,500, युवाओं से 9,000 और अल्पसंख्यक समुदायों से 2,500 लाभार्थी शामिल होंगे।
9 अक्टूबर, 2026 को अधिसूचनाओं के माध्यम से बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट, 2026 को भी क्रियान्वित किया गया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का अर्थ है व्यापार करने में आसानी, यानी सरकार ने व्यवसायों को स्थापित करने और चलाने के लिए प्रक्रियाओं को कितना सरल बनाया है। इसका उद्देश्य तेज़ अनुमोदन, स्व-प्रमाणीकरण और कम निरीक्षणों के साथ औद्योगिक शासन को सरल बनाना है। राज्य ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से ₹5 लाख करोड़ का औद्योगिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। PPP मॉडल में सरकार और निजी कंपनियाँ मिलकर परियोजनाएँ चलाती हैं।
