बिहार शहरी विकास विभाग निविदाओं के लिए दस्तावेज़ सत्यापन को सख्त करेगा

ThisNews Desk
बिहार शहरी विकास विभाग निविदाओं के लिए दस्तावेज़ सत्यापन को सख्त करेगा
चित्र: Ferdie Cayanga / Pexels

बिहार के शहरी विकास एवं आवास विभाग ने 6 अक्टूबर, 2026 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसके तहत निविदाओं को अंतिम रूप देने से पहले बोलीदाताओं (bidders) द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का सत्यापन (verification) अब और अधिक कठोरता से किया जाएगा। यह कदम राज्य में सरकारी ठेकों (government contracts) में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

शहरी विकास मंत्री नीतीश मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ठेके (contracts) देने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की गहन जांच और सत्यापन के लिए एक प्रणाली स्थापित की जाए। अब तक, कई बार शिकायतें मिलने के बाद दस्तावेजों की जांच की जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत यह प्रक्रिया निविदा (tender) को अंतिम रूप देने से पहले ही पूरी कर ली जाएगी। इसका मुख्य लक्ष्य जाली प्रमाणपत्रों (forged credentials) और अनियमितताओं (irregularities) को कम करना है, जिससे छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए एक समान और भरोसेमंद कारोबारी माहौल बन सके।

नए निर्देशों के अनुसार, यदि किसी सफल बोलीदाता के दस्तावेज़ निविदा को अंतिम रूप दिए जाने के बाद जाली पाए जाते हैं, तो उस बोलीदाता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह उन लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो गलत जानकारी या फर्जी कागजात के साथ सरकारी ठेके प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

इसके अतिरिक्त, निविदा प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और इंजीनियरों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। यदि दस्तावेज़ सत्यापन या निविदा निपटान में किसी भी प्रकार की चूक पाई जाती है, और अनियमितताएँ स्थापित होती हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि विभाग के भीतर भी जवाबदेही बनी रहे और कोई भी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बच न सके।

बिहार सरकार ने स्थानीय व्यवसायों और उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां पेश की हैं। यह नई निविदा सत्यापन प्रणाली भी इसी दिशा में एक कदम है, जिसका उद्देश्य ईमानदार और योग्य बोलीदाताओं को अवसर प्रदान करना और राज्य की विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करना है। यह पहल बिहार के व्यापारिक समुदाय के लिए एक सकारात्मक बदलाव लाएगी, जिससे उन्हें सरकारी परियोजनाओं में भाग लेने का अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी मंच मिलेगा।

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