बिहार सरकार ने राज्य में उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अपनी "स्टार्टअप बिहार" पहल को 2026 में महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया है। इस पहल के तहत, राज्य-समर्थित सीड फंडिंग को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया गया है। यह महत्वपूर्ण घोषणा राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस 2026 के अवसर पर पटना में आयोजित अविन्या बिहार 2.0 कार्यक्रम में की गई।
सीड फंडिंग का अर्थ है किसी नए व्यवसाय को शुरू करने के लिए दी जाने वाली प्रारंभिक पूंजी। यह वृद्धि नए उद्यमों के लिए शुरुआती चरण की फंडिंग चुनौतियों को कम करने के उद्देश्य से की गई है। अक्सर, नए व्यवसायों को शुरुआती दौर में पूंजी जुटाने में कठिनाई होती है, और यह बढ़ी हुई राशि उन्हें अपने विचारों को वास्तविकता में बदलने में मदद करेगी। यह संशोधित फंडिंग दो चरणों में वितरित की जाएगी, जिससे स्टार्टअप्स को अपनी प्रगति के अनुसार वित्तीय सहायता प्राप्त हो सकेगी।
बिहार स्टार्टअप नीति, जो मूल रूप से अगस्त 2022 में शुरू की गई थी और बाद में संशोधित की गई, उद्योग विभाग, बिहार सरकार द्वारा संचालित एक प्रमुख योजना है। इस योजना का प्रबंधन स्टार्टअप बिहार पोर्टल (startup.bihar.gov.in) के माध्यम से किया जाता है। यह नीति ब्याज-मुक्त सीड ग्रांट प्रदान करती है, जिसका अर्थ है कि स्टार्टअप्स को दी गई राशि पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं देना होगा। यह ग्रांट दस वर्षों की अवधि में चुकाने योग्य है, जिससे व्यवसायों को पुनर्भुगतान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
सामान्य स्टार्टअप्स इस योजना के तहत ₹25 लाख तक की सीड फंडिंग के लिए पात्र हैं। यह कदम बिहार में एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रोत्साहन है, जिससे युवा उद्यमियों को अपने नवीन विचारों को साकार करने और राज्य के आर्थिक विकास में योगदान करने का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल नए व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है बल्कि उन्हें एक सहायक वातावरण भी देती है जहाँ वे फल-फूल सकें। उद्यमिता को बढ़ावा देने से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
