नीति आयोग रिपोर्ट: बिहार निवेश आकर्षित करने में पिछड़ा, सरकार ने ₹505 करोड़ के नए औद्योगिक प्रोजेक्ट मंजूर किए

ThisNews Desk
नीति आयोग रिपोर्ट: बिहार निवेश आकर्षित करने में पिछड़ा, सरकार ने ₹505 करोड़ के नए औद्योगिक प्रोजेक्ट मंजूर किए
चित्र: Satyam Pixels / Pexels

एक हालिया नीति आयोग की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि बिहार निवेशकों को आकर्षित करने में अभी भी काफी पीछे है। जुलाई 2026 में जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, "निवेश-अनुकूल सूचकांक" में बिहार 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 26वें स्थान पर और 17 बड़े राज्यों में 17वें स्थान पर है। राज्य ने 100 में से 41.2 अंक प्राप्त किए, जिससे इसे झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के साथ 'उभरते प्रदर्शनकर्ता' श्रेणी में रखा गया है। यह सूचकांक दर्शाता है कि राज्य में व्यवसाय स्थापित करना या उनका विस्तार करना कितना आसान है। रिपोर्ट ने बिहार के निवेश माहौल में संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर किया, जिनमें बुनियादी ढांचा, कारोबारी माहौल, नवाचार, वित्तीय पहुंच, संस्थागत स्थितियां और भूमि की उपलब्धता की जटिलता शामिल है।

छोटे व्यवसायों और उद्यमियों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि कम निवेश आकर्षित होने से रोजगार सृजन और आर्थिक विकास सीधे प्रभावित होता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 के दौरान बिहार को केवल 0.16 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मिला। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का अर्थ है कि विदेशी कंपनियों द्वारा बिहार में किए गए निवेश से पूंजी, तकनीक और रोजगार के अवसर आते हैं। इसके अतिरिक्त, 2023 में देश में कुल पेटेंट आवेदनों में बिहार की कंपनियों का योगदान केवल 0.48% था, जो नवाचार की कमजोरी को दर्शाता है। पेटेंट किसी आविष्कार पर मिलने वाला कानूनी अधिकार है, और कम आवेदन मतलब कम नए विचार और उत्पाद।

हालांकि, इस चुनौतीपूर्ण मूल्यांकन के बावजूद, बिहार सरकार अपने निवेश परिदृश्य को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA), जिसके अध्यक्ष उद्योग विभाग के सचिव-सह-प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार हैं, ने हाल ही में 3 सितंबर, 2026 को 26 नए औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से 505.27 करोड़ रुपये का निवेश आने और लगभग 5,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। ये स्वीकृत परियोजनाएं खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, चमड़े के वस्त्र, बैग और बेल्ट निर्माण, पशु चारा और सामान्य विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में फैली हुई हैं।

राज्य ने निवेश आकर्षित करने के लिए कई नई नीतियां भी पेश की हैं, जिनमें बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025, बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026, जैव ईंधन उत्पादन प्रोत्साहन नीति 2025, निर्यात प्रोत्साहन नीति 2024, बिहार लॉजिस्टिक्स नीति 2024 और BIADA भूमि आवंटन और प्रबंधन नीति 2026 शामिल हैं। राज्य का लक्ष्य अपनी नई भूमि नीति के माध्यम से ₹50 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करना है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना (MMUY) के तहत 44,000 से अधिक लाभार्थियों को 3,195 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। यह योजना उद्यमियों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। 'स्टार्टअप बिहार' पहल के तहत नए व्यवसायों (स्टार्टअप) को 10 लाख रुपये तक की सीड फंडिंग (प्रारंभिक पूंजी) और 15 लाख रुपये की पोस्ट-सीड फंडिंग (विस्तार के लिए अतिरिक्त पूंजी) की पेशकश की जाती है।

ये सरकारी पहल और परियोजनाएं बुनियादी ढांचे, वित्त तक पहुंच और संस्थागत समर्थन में मौजूदा कमियों को दूर करने, अधिक निवेशक-अनुकूल माहौल बनाने और स्थानीय उद्यमियों और श्रमिकों के लिए अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखती हैं।

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