बिहार के 836 पीएम श्री स्कूलों को फंड संकट, केंद्र से 22 करोड़ का अतिरिक्त बजट मांगा

S Sakar(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 1:54 pm बजे)
बिहार के 836 पीएम श्री स्कूलों को फंड संकट, केंद्र से 22 करोड़ का अतिरिक्त बजट मांगा
चित्र: Pixabay / Pexels

बिहार में शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य के 836 पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) स्कूलों के संचालन और विकास के लिए ₹21.96 करोड़ (₹2,196.06 लाख) की वित्तीय कमी की पहचान की गई है। बिहार शिक्षा विभाग ने 4 अगस्त, 2026 तक की स्थिति के अनुसार इस कमी को स्वीकार करते हुए, केंद्र सरकार से इन स्कूलों के सुचारु संचालन और अपेक्षित विकास को सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय आवंटन (फंडिंग) को संशोधित करने का औपचारिक अनुरोध किया है।

पीएम श्री योजना का उद्देश्य मौजूदा स्कूलों को मॉडल स्कूलों में अपग्रेड करना है, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा, डिजिटल शिक्षा और समग्र विकास शामिल है। यह योजना छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए भी अवसर पैदा करती है, क्योंकि इसमें निर्माण कार्य, उपकरणों की खरीद और विभिन्न सेवाओं की आवश्यकता होती है।

वित्तीय कमी के पीछे कई कारण बताए गए हैं। योजना के कार्यान्वयन (implementation) की वास्तविक लागत मूल अनुमानों से काफी अधिक हो गई है। इसका मुख्य कारण निर्माण सामग्री, जैसे सीमेंट, स्टील और ईंटों की बढ़ती कीमतें हैं, जिसका सीधा असर स्थानीय ठेकेदारों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं पर पड़ता है। इसके अलावा, डिजिटल उपकरण, जैसे कंप्यूटर, स्मार्टबोर्ड और नेटवर्किंग उपकरण की लागत में भी वृद्धि हुई है, जो प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण लागत कारक है।

स्कूलों के बुनियादी ढांचे (infrastructure) के उन्नयन (upgrades) में भी अधिक खर्च आ रहा है, जिसमें कक्षाओं का नवीनीकरण, प्रयोगशालाओं का निर्माण और खेल सुविधाओं का विकास शामिल है। इन कार्यों के लिए विभिन्न प्रकार के ठेकेदारों, जैसे सिविल ठेकेदार, इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर की आवश्यकता होती है। विभिन्न प्रशासनिक खर्चों में भी वृद्धि हुई है, जो स्थानीय सेवाओं और आपूर्तियों को प्रभावित करते हैं।

शिक्षा विभाग का यह अनुरोध बिहार के छोटे व्यवसायियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि केंद्र सरकार वित्तीय आवंटन में वृद्धि करती है, तो इससे इन 836 स्कूलों में चल रहे या प्रस्तावित विकास कार्यों को गति मिलेगी। यह निर्माण उद्योग, डिजिटल उपकरण आपूर्तिकर्ताओं, सेवा प्रदाताओं और अन्य संबंधित क्षेत्रों में स्थानीय व्यवसायों के लिए निरंतर काम और आर्थिक अवसर सुनिश्चित करेगा। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन स्कूलों को पर्याप्त धन मिले ताकि वे बिहार के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकें और राज्य के समग्र मानव संसाधन विकास में योगदान दे सकें।

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