बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 3 अक्टूबर, 2026 को BIADA के प्रबंध निदेशक नवीन कुमार की अध्यक्षता में हुई परियोजना निकासी समिति (PCC) की बैठक में 12 सूक्ष्म (माइक्रो) और लघु (स्मॉल) औद्योगिक इकाइयों को 9.14 एकड़ औद्योगिक भूमि और "प्लग-एंड-प्ले" शेड आवंटित करने की मंजूरी दी गई। इस निर्णय से बिहार में लगभग 132.60 करोड़ रुपये का निवेश आने और करीब 2,500 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
"प्लग-एंड-प्ले" सुविधा का अर्थ है कि निवेशकों को तैयार औद्योगिक ढाँचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) मिलेगा। इससे उन्हें अपनी इकाइयाँ स्थापित करने और संचालन शुरू करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा, जिससे प्रक्रिया सरल और तेज होगी। ये स्वीकृत औद्योगिक इकाइयाँ बिहार के नौ जिलों – पटना, बक्सर, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, भागलपुर, पूर्णिया, मधुबनी, औरंगाबाद और सहरसा – में स्थापित की जाएंगी।
उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने बताया कि इन परियोजनाओं से बिहार के औद्योगिक और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल-आधारित अवसर भी सृजित होंगे।
यह पहल बिहार सरकार के निवेशक-अनुकूल माहौल बनाने और राज्य को एक आधुनिक औद्योगिक तथा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई नीतियां और प्रोत्साहन लागू किए हैं। इनमें 26 अगस्त, 2025 को अनुमोदित और 31 दिसंबर, 2026 तक विस्तारित "बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025" शामिल है, जो विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, BIADA ने मई 2026 में एक नई भूमि आवंटन नीति की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य भूमि आवंटन प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
हाल ही में, 9 अक्टूबर, 2026 को "बिहार MSME नीति 2026" का भी शुभारंभ किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उद्यमिता के माध्यम से एक करोड़ परिवारों को सशक्त बनाने और एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा। उद्योग विभाग ने 25 सितंबर, 2026 को "बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2026" विकसित करने के लिए IIM बोधगया के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
ये सभी घटनाक्रम बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनसे औद्योगिक निवेश में तेजी आने, राज्य के औद्योगिक आधार का विस्तार होने और महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों पर विशेष ध्यान, सहायक नीतियों और बुनियादी ढाँचे के साथ मिलकर स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में लगने वाले समय को कम करेगा।
