बिहार के मुख्यमंत्री 27 अक्टूबर को केंद्र के समक्ष गंगा जल-बंटवारे संधि पर राज्य की चिंताएं रखेंगे

ThisNews Desk
बिहार के मुख्यमंत्री 27 अक्टूबर को केंद्र के समक्ष गंगा जल-बंटवारे संधि पर राज्य की चिंताएं रखेंगे
चित्र: David McElwee / Pexels

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जिन्होंने 15 अप्रैल, 2026 को पदभार ग्रहण किया था, 27 अक्टूबर, 2026 को केंद्र सरकार के समक्ष गंगा जल-बंटवारे संधि से संबंधित राज्य की चिंताओं को प्रस्तुत करेंगे। यह कदम बिहार के आर्थिक विकास और विभिन्न क्षेत्रों पर गंगा नदी के महत्व को रेखांकित करता है।

गंगा नदी बिहार के लिए केवल एक पवित्र नदी नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। इसके जल का उपयोग कृषि, उद्योग, मत्स्य पालन और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, और यहाँ के लाखों किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए गंगा और उसकी सहायक नदियों के पानी पर निर्भर करते हैं। जल की पर्याप्त उपलब्धता सीधे तौर पर कृषि उत्पादन को प्रभावित करती है, जिससे अनाज व्यापारी, उर्वरक विक्रेता, बीज आपूर्तिकर्ता और कृषि उपकरण आपूर्तिकर्ता जैसे कृषि-आधारित व्यवसायों की आय और स्थिरता प्रभावित होती है। जल की कमी इन व्यवसायों के लिए गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर सकती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इसके अतिरिक्त, राज्य में कई छोटे और मध्यम उद्योग (MSME) तथा विनिर्माण इकाइयाँ अपने संचालन के लिए जल पर निर्भर करती हैं। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ, कपड़ा उद्योग और अन्य छोटे कारखाने अक्सर बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग करते हैं। जल की कमी या अनिश्चित आपूर्ति इन उद्योगों के लिए उत्पादन लागत बढ़ा सकती है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है और अंततः रोजगार के अवसरों पर भी असर पड़ सकता है। निर्माण क्षेत्र में ठेकेदारों के लिए भी जल एक आवश्यक संसाधन है, विशेषकर सड़क निर्माण, भवन निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में। पर्याप्त जल आपूर्ति के बिना, इन परियोजनाओं में देरी हो सकती है, जिससे लागत बढ़ सकती है और ठेकेदारों के लिए वित्तीय नुकसान हो सकता है।

राज्य सरकार का यह प्रयास सुनिश्चित करने के लिए है कि गंगा जल का उचित और न्यायसंगत बंटवारा हो, जिससे बिहार के हितों की रक्षा हो सके। मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र के समक्ष इन चिंताओं को रखने का उद्देश्य एक ऐसा समाधान खोजना है जो राज्य की वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करे और इसके समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा दे। यह पहल बिहार के छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए एक स्थिर और अनुमानित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अंततः राज्य की समग्र समृद्धि में योगदान देगा। जल सुरक्षा से निवेश आकर्षित करने और नए व्यवसायों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाने में भी मदद मिलेगी।

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