बिहार सरकार की गेंदा फूल योजना: खेती और परिवहन पर 50% सब्सिडी, किसानों को मिलेगा लाभ

ThisNews Desk
बिहार सरकार की गेंदा फूल योजना: खेती और परिवहन पर 50% सब्सिडी, किसानों को मिलेगा लाभ
चित्र: Davis Arenas / Pexels

बिहार सरकार ने राज्य में गेंदा फूल की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए "गेंदा फूल उत्पादन एवं प्रसंस्करण योजना" 2026-27 की घोषणा की है। कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय द्वारा शुरू की गई यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

इस योजना के तहत, गेंदा फूल की खेती के लिए अनुमानित इकाई लागत ₹80,000 प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। किसानों को इस लागत पर 50% की सब्सिडी मिलेगी, जो अधिकतम ₹40,000 प्रति हेक्टेयर होगी। व्यक्तिगत किसान न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर और अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि के लिए इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। खेती को 25 हेक्टेयर के क्लस्टर (समूहों) में व्यवस्थित किया जाएगा, जिन्हें एक या दो पड़ोसी पंचायतों से चुना जाएगा, जिसमें रबी और खरीफ दोनों मौसम शामिल होंगे।

खेती पर सब्सिडी के अलावा, यह योजना गेंदा फूल के परिवहन के लिए गाड़ी खरीदने पर भी 50% सब्सिडी प्रदान करती है। एक वाहन के लिए अधिकतम सब्सिडी ₹3,25,000 है, जिसकी गणना ₹6,50,000 की अनुमानित लागत या वाहन की वास्तविक कीमत के 50% में से जो भी कम हो, उसके आधार पर की जाएगी। यह प्रावधान किसानों को अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में मदद करेगा।

योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर, 2026 को शुरू हुई थी और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2026 है। किसान बिहार कृषि ऐप या उद्यान निदेशालय की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने फूलों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार के जोर को रेखांकित किया है। जिन किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है, जैसे बटाईदार या किराएदार, वे भी लीज एग्रीमेंट (पट्टे का समझौता) जमा करके इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। बांका, मोतिहारी और सीवान जैसे जिलों के लिए इस योजना के तहत विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

यह पहल बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जिसका लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना और पारंपरिक फसलों से परे विविधीकरण को बढ़ावा देना है। गेंदा फूल की बिहार में सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के लिए साल भर उच्च मांग रहती है, जिसे वर्तमान में आयात से पूरा किया जाता है। स्थानीय खेती से किसानों को एक तैयार बाजार मिलेगा और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। योजना में प्राथमिक मूल्य संवर्धन (जैसे सूखे फूल आधारित इकाइयां) के प्रावधान भी शामिल हैं, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों को लाभ होगा, जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

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