बिहार सरकार ने राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। 'लेडी रोजेटा क्षेत्र विस्तार योजना' के तहत, चिप्स और फ्रेंच फ्राइज़ बनाने के लिए उपयुक्त 'लेडी रोजेटा' आलू की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना में किसानों को खेती की लागत पर 75 प्रतिशत की भारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह कदम बिहार को आलू उत्पादन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाने में सहायक होगा।
इस योजना के अंतर्गत, प्रति हेक्टेयर खेती की कुल अनुमानित लागत 1,25,150 रुपये है। किसानों को प्रति हेक्टेयर 93,863 रुपये की सब्सिडी मिलेगी, जो कुल लागत का 75 प्रतिशत है। यह वित्तीय सहायता दो किस्तों में दी जाएगी: पहली किस्त में बीज और अन्य सामग्री खरीदने के लिए 70,397 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे, जबकि दूसरी किस्त में 23,466 रुपये प्रति हेक्टेयर आलू की बुवाई के बाद खेत के निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के उपरांत दिए जाएंगे। योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 30 क्विंटल बीज की आवश्यकता है, और बीज अधिकतम 4,000 रुपये प्रति क्विंटल या वास्तविक मूल्य, जो भी कम हो, पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रशासनिक रूप से स्वीकृत इस योजना का लक्ष्य बिहार के 30 जिलों में 1500 हेक्टेयर भूमि को कवर करना है। इनमें औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, गया, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, नालंदा, नवादा, पटना, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा, सीवान और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। इस योजना को उद्यानिकी विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा तथा कृषि विभाग की अपर सचिव कल्पना कुमारी ने इस योजना की घोषणा और अनुमोदन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 14 करोड़ 7 लाख 94 हजार 500 रुपये (₹14,07,94,500) का आवंटन स्वीकृत किया गया है।
योजना के लिए आवेदन पहले 15 जनवरी, 2026 तक खुले थे, और चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया गया। 0.1 हेक्टेयर (0.25 एकड़) से लेकर 2 हेक्टेयर (5 एकड़) तक की भूमि वाले किसान इसमें भाग लेने के पात्र थे। लेडी रोजेटा आलू की बुवाई आमतौर पर रबी मौसम में, अक्टूबर के अंत से नवंबर के मध्य तक की जाती है।
यह पहल बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका उद्देश्य किसानों को सीधे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़कर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। 'खाद्य प्रसंस्करण उद्योग' वह क्षेत्र है जहाँ कृषि उत्पादों को तैयार खाद्य पदार्थों में बदला जाता है, जैसे आलू से चिप्स या फ्रेंच फ्राइज़ बनाना। इस उच्च-मूल्य वाले, प्रसंस्करण-ग्रेड आलू की खेती को बढ़ावा देकर, बिहार देश में एक प्रमुख उत्पादक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है और राज्य के 'कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र' (कृषि उत्पादों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने वाला क्षेत्र) के लिए आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ाना चाहता है। अनुकूल परिस्थितियों में किसान प्रति हेक्टेयर 1,50,000 रुपये से 2,10,000 रुपये तक का सकल लाभ प्राप्त करने की उम्मीद कर सकते हैं।
