NHAI ने सुपौल-दरभंगा फोरलेन के लिए टेंडर जारी किया, निर्माण प्रक्रिया शुरू

ThisNews Desk(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 4:13 pm बजे)
NHAI ने सुपौल-दरभंगा फोरलेन के लिए टेंडर जारी किया, निर्माण प्रक्रिया शुरू
चित्र: Sóc Năng Động / Pexels

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बिहार में सुपौल-दरभंगा फोर-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जुलाई 2026 में, NHAI ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय परामर्श सेवाओं हेतु एक टेंडर (निविदा) जारी किया है। यह कदम राज्य में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

यह प्रस्तावित 80 किलोमीटर लंबा फोर-लेन राजमार्ग सुपौल को बेरिया मंच और माधोपुर होते हुए दरभंगा से जोड़ेगा। केंद्र सरकार ने बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के लगातार प्रयासों के बाद 8 जुलाई, 2026 को इस नए राष्ट्रीय राजमार्ग को मंजूरी दी थी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने NHAI को डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

डीपीआर टेंडर, जिसका मूल्य ₹5.7 करोड़ है, 4 अगस्त, 2026 को बंद हो गया। चयनित एजेंसी को नौ महीने के भीतर एक व्यापक अध्ययन पूरा करना होगा। इस अध्ययन में परियोजना की व्यवहार्यता (feasibility), भूमि अधिग्रहण की आवश्यकताएं, पुलों और पुलियों की जरूरत, यातायात घनत्व (traffic density), पर्यावरणीय प्रभाव और अनुमानित निर्माण लागत जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा। वास्तविक निर्माण कार्य डीपीआर को मंजूरी मिलने, भूमि अधिग्रहण पूरा होने और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं के बाद ही शुरू होगा।

यह परियोजना बिहार की अर्थव्यवस्था और यहां के निवासियों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। यह सुपौल, दरभंगा और मधुबनी के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ाएगी, जिससे यात्रा तेज और सुरक्षित होगी। बेहतर सड़क नेटवर्क से व्यापार, वाणिज्यिक गतिविधियों और औद्योगिक परिवहन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, खासकर मखाना, मछली, डेयरी उत्पाद और आम जैसे कृषि उत्पादों के लिए। ये उत्पाद बड़े बाजारों, रेलवे जंक्शनों और दरभंगा हवाई अड्डे तक अधिक कुशलता से पहुंच पाएंगे, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं और व्यापारियों का व्यवसाय बढ़ सकता है। इसके अतिरिक्त, यह दरभंगा हवाई अड्डे और निर्माणाधीन एम्स दरभंगा तक यात्रा के समय को कम करेगा, जिससे सुपौल, सहरसा और आसपास के जिलों के निवासियों को लाभ होगा। निर्माण चरण स्वयं ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा करेगा, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।

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