लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान 24 सितंबर, 2026 को पटना में 'यूथ बोले तो' कार्यक्रम के माध्यम से बिहार के युवाओं, विशेषकर Gen Z से सीधा संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम पटना के वेटनरी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित होगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को अपने भविष्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर विचार व्यक्त करने और चिराग पासवान से सीधे जुड़ने का एक मंच प्रदान करना है। चर्चा के मुख्य विषयों में शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास (नौकरियों के लिए जरूरी हुनर सीखना), उद्यमिता (अपना व्यवसाय शुरू करना), प्रौद्योगिकी और डिजिटल युग की चुनौतियाँ शामिल होने की उम्मीद है। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र विवेक ने इस कार्यक्रम की घोषणा की, जिसमें बताया गया कि युवा विंग को इसके आयोजन और समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी कार्यकर्ता व्यापक युवा भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
यह पहल बिहार के युवाओं के लिए व्यापक आर्थिक विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। बिहार सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों (2025-2030) में एक करोड़ (10 मिलियन) युवाओं के लिए रोजगार सृजित करना है। इसमें युवा, रोजगार एवं कौशल विकास; उच्च शिक्षा; और नागरिक उड्डयन जैसे तीन नए विभागों की स्थापना शामिल है। जुलाई 2025 में अनुमोदित बिहार युवा नीति भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार सृजन और उद्यमिता पर केंद्रित है। इसमें बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) और मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। सरकार बिहार को पूर्वी भारत के "टेक हब" (प्रौद्योगिकी केंद्र) के रूप में स्थापित करने पर भी काम कर रही है, जिसमें रक्षा गलियारा, सेमीकंडक्टर विनिर्माण पार्क, वैश्विक क्षमता केंद्र और मेगा टेक व फिनटेक शहर जैसी योजनाएं हैं, जिनका उद्देश्य बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार सृजन करना है। इसके अतिरिक्त, नौ बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने की भी योजना है।
'यूथ बोले तो' कार्यक्रम बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs - छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। यह युवाओं को, जो कार्यबल और संभावित उद्यमियों का एक बड़ा हिस्सा हैं, आर्थिक अवसरों और चुनौतियों के संबंध में अपनी चिंताओं और सुझावों को व्यक्त करने का सीधा माध्यम प्रदान करता है। कौशल विकास, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी पर चर्चा नीति और कार्यक्रम विकास को सीधे प्रभावित कर सकती है, जिससे MSMEs के विकास और अधिक कुशल कार्यबल के निर्माण का समर्थन करने वाली पहलें सामने आ सकती हैं। डिजिटल युग की चुनौतियों और बदलते रोजगार के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करना बिहार की अर्थव्यवस्था को आधुनिक मांगों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।
