गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए NHAI ने फिर मांगी वन मंजूरी, बिहार में 415 किमी हिस्सा महत्वपूर्ण

ThisNews Desk(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 1:59 pm बजे)
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए NHAI ने फिर मांगी वन मंजूरी, बिहार में 415 किमी हिस्सा महत्वपूर्ण
चित्र: Khalid Khan / Pexels

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है। यह एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जिसे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। "ग्रीनफील्ड कॉरिडोर" का अर्थ है कि यह सड़क पूरी तरह से नई भूमि पर बनाई जा रही है, जिससे आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार इसका इष्टतम डिजाइन और निर्माण संभव हो पाता है।

यह एक्सप्रेसवे कुल मिलाकर लगभग 519 से 525.5 किलोमीटर लंबा होगा। इसे चार-लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड राजमार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें भविष्य में छह या आठ लेन तक विस्तार का प्रावधान है। "एक्सेस-कंट्रोल्ड" का मतलब है कि इस राजमार्ग पर प्रवेश और निकास केवल विशिष्ट स्थानों (जैसे इंटरचेंज) से ही संभव होगा, जिससे यातायात का प्रवाह सुगम, तेज और सुरक्षित बना रहेगा, और स्थानीय यातायात से कोई बाधा नहीं आएगी।

बिहार के लिए यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 415 से 417 किलोमीटर, राज्य से होकर गुजरेगा। यह बिहार के आठ जिलों से होकर निकलेगा, जिनमें पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण प्रमुख हैं। यह विशाल खंड बिहार के आंतरिक क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से सीधे जोड़ेगा, जिससे राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए यह एक्सप्रेसवे कई नए अवसर लेकर आएगा। माल ढुलाई अब पहले से कहीं अधिक तेज, कुशल और सस्ती हो जाएगी। परिवहन लागत में कमी आने से उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और व्यवसायों का मुनाफा बढ़ सकता है। निर्माण क्षेत्र में ठेकेदारों के लिए परियोजना के विभिन्न चरणों में काम के अवसर पैदा होंगे।

इसके अलावा, यह एक्सप्रेसवे लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, सड़क किनारे सुविधाओं और संबंधित सेवाओं में नए उद्यमों को बढ़ावा देगा। किसान अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक अधिक आसानी और तेजी से पहुंचा पाएंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह परियोजना बिहार के आर्थिक विकास को गति देने, क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर में और पढ़ें