बिहार के छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार ने एक बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना को हरी झंडी दे दी है। बिहार कैबिनेट ने 20 अगस्त, 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में बक्सर और भागलपुर को जोड़ने वाले 336 किलोमीटर लंबे, छह-लेन वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय की घोषणा कैबिनेट सचिवालय विभाग के सचिव मो. सोहेल ने की।
यह पूरी तरह से एक्सेस-नियंत्रित गलियारा (जिसमें प्रवेश और निकास केवल निर्धारित स्थानों से ही संभव होगा, जिससे यातायात सुचारु और तेज गति से चलेगा) राज्य के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के 13 जिलों में कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹3,700 करोड़ है।
यह एक्सप्रेसवे बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर जिलों से होकर गुजरेगा। हालांकि पटना सीधे इसके संरेखण पर नहीं है, इसे जहानाबाद के माध्यम से मौजूदा चार-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा जाएगा।
इस एक्सप्रेसवे के बनने से बक्सर और भागलपुर के बीच यात्रा का समय मौजूदा 10-12 घंटे से घटकर लगभग 4-5 घंटे रह जाने की उम्मीद है। यह समय की बचत व्यवसायों के लिए लॉजिस्टिक्स (माल और सेवाओं के कुशल आवागमन का प्रबंधन) को बहुत बेहतर बनाएगी, जिससे सामानों की आवाजाही तेज होगी और औद्योगिक विस्तार (उद्योगों का विकास और वृद्धि) को बढ़ावा मिलेगा।
यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित की जाएगी, जिसमें सरकार और निजी कंपनियां मिलकर निवेश और संचालन करेंगी। बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (BSRDCL) को इस परियोजना को लागू करने के लिए अधिकृत किया गया है, जिसमें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सलाहकार और लेनदेन सलाहकार को नियुक्त करना शामिल है। डीपीआर सलाहकार परियोजना की विस्तृत योजना तैयार करेगा, जबकि लेनदेन सलाहकार वित्तीय और कानूनी पहलुओं पर सलाह देगा। भूमि अधिग्रहण और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं इसके बाद शुरू होंगी। परियोजना के पूरा होने की कोई विशिष्ट तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
अधिकारियों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यह 13 जुड़े हुए जिलों के निवासियों और व्यवसायों के लिए प्रमुख शहरों और बाजारों तक पहुंच में सुधार करेगा। इससे नए निवेश आकर्षित होंगे, नए सड़क नेटवर्क के किनारे वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और उन क्षेत्रों में आर्थिक अवसर पैदा होंगे जहां ऐतिहासिक रूप से उच्च गति वाले सड़क बुनियादी ढांचे तक सीमित पहुंच थी। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (उत्तर प्रदेश) के साथ इसके प्रस्तावित जुड़ाव से बिहार का व्यापक राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क के साथ एकीकरण भी मजबूत हो सकता है, जिससे व्यापार और वाणिज्य को और लाभ होगा।
