दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की DPR रेल मंत्रालय को सौंपी गई

ThisNews Desk
दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की DPR रेल मंत्रालय को सौंपी गई
चित्र: Noval Gani / Pexels

बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण हाई-स्पीड रेल परियोजना ने गति पकड़ी है। राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने 15 सितंबर, 2026 को दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेल मंत्रालय को सौंप दी है। यह परियोजना केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे पूरे भारत में लगभग ₹16 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि बिहार से होकर वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ने वाला एक नया हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर चलेगा। एक अन्य प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली को वाराणसी के रास्ते पटना से जोड़ेगा, जो उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा। वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर ट्रेनें 300-350 किमी/घंटा की गति से चलने की उम्मीद है, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इस मार्ग पर बिहार में पटना और कटिहार में ठहराव प्रस्तावित हैं। दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और किशनगंज जैसे शहरों पर विचार किया जा रहा है। दिल्ली और पटना के बीच यात्रा का समय लगभग 4 घंटे 30 मिनट से 4 घंटे 55 मिनट तक कम होने का अनुमान है, जबकि पटना के रास्ते वाराणसी-सिलीगुड़ी की यात्रा तीन घंटे से भी कम समय में पूरी हो सकेगी।

NHSRCL, जो भारतीय रेलवे की एक सहायक कंपनी है, इन हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है। सिलीगुड़ी-वाराणसी कॉरिडोर के लिए सर्वेक्षण कार्य जुलाई 2026 में शुरू हुआ था, और DPR मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। DPR को अंतिम रूप देने और आवश्यक अनुमोदन प्राप्त होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार को रेल अवसंरचना विकास के लिए ₹10,379 करोड़ आवंटित किए गए हैं, और राज्य में वर्तमान में ₹1.09 लाख करोड़ की रेल परियोजनाएं चल रही हैं।

यह हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा। यह यात्रियों की आवाजाही को बेहतर बनाएगा, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा और रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से वस्तुओं और लोगों की आवाजाही आसान होगी, निवेश आकर्षित होगा और बिहार राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत होगा। नए आर्थिक गलियारों के निर्माण से स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स लागत (माल ढुलाई और वितरण का खर्च) में कमी आएगी। निर्माण चरण में ही नौकरियां पैदा होंगी, और बेहतर पहुंच से निवेशकों को आकर्षित करने, शहरी विस्तार को प्रोत्साहित करने और नए विकास गलियारों का निर्माण होने की उम्मीद है, जिससे रियल एस्टेट बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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