दिल्ली में 15 अक्टूबर, 2026 को एक स्वतंत्र आयोग की सुनवाई में "पहले वोट गया, फिर झुग्गी गई" शीर्षक के तहत चुनावी सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और उसके बाद झुग्गी-झोपड़ियों को गिराने से संबंधित व्यापक शिकायतों का खुलासा हुआ। बिहार सहित कई राज्यों के गवाहों ने पूर्व न्यायाधीशों, न्यायमूर्ति ए. के. पटनायक, रेखा शर्मा और अंजना प्रकाश के पैनल के समक्ष गवाही दी। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
यह स्थिति बिहार के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है क्योंकि दिल्ली के अनौपचारिक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा बिहार के प्रवासी श्रमिकों का है। इन श्रमिकों द्वारा घर भेजी जाने वाली धनराशि (रेमिटेंस) बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। रेमिटेंस वह पैसा होता है जो प्रवासी श्रमिक अपने मूल स्थान पर अपने परिवारों को भेजते हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देता है। दिल्ली में आवास और मतदान के अधिकार खोने से इन परिवारों के लिए आर्थिक अस्थिरता पैदा होती है और उन्हें बिहार लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जहां नौकरी के अवसर सीमित हो सकते हैं।
गवाहों ने अपनी आपबीती सुनाई। मयूर विहार फेज-I की 58 वर्षीय घरेलू सहायिका माया देवी की झुग्गी हाल ही में गिरा दी गई थी और उनका तथा उनकी दो बेटियों का नाम मतदाता सूची से गायब था। 1984 में बिहार से दिल्ली आए माता-पिता के बेटे, दिल्ली के भूमिहीन कैंप में जन्मे 30 वर्षीय अनिल सिंह ने बताया कि उनकी झुग्गी गिराए जाने के बाद उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची से हटा दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि 2017 में उनकी जानकारी के बिना उनका नाम बिहार की मतदाता सूची में जोड़ दिया गया था। इसी तरह, बिहार के अररिया के 76 वर्षीय मुहम्मद इलियास का दिल्ली के धोबी घाट झुग्गी क्लस्टर में स्थित घर 2020 में ध्वस्त कर दिया गया था।
आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने जुलाई 2025 में आरोप लगाया था कि दिल्ली में पूर्वांचल और बिहार के लोगों के घरों और दुकानों को तोड़ा जा रहा है, इसे आगामी बिहार चुनावों से जोड़ते हुए कहा कि बिहार के लोगों को दिल्ली से हटाने वालों को बिहार की जनता हटा देगी।
एक संबंधित घटनाक्रम में, बिहार के प्रवासी श्रमिक पोर्टल से 2026 के मौजूदा आंकड़ों से पता चलता है कि बिहार का प्रवासी कार्यबल दिल्ली के बजाय नोएडा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस बदलाव का श्रेय नोएडा में आईटी, निर्माण, विनिर्माण और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में स्थिर रोजगार के अवसरों को दिया जाता है, जिससे किराये के आवास और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ रही है। यह क्षेत्र के लिए एक नए विकास इंजन का संकेत दे सकता है। विकास इंजन का अर्थ है एक ऐसा क्षेत्र या उद्योग जो आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देता है।
SIR की अंतिम सूची 4 दिसंबर, 2026 को जारी होने वाली है। वर्तमान स्थिति यह है कि चुनाव आयोग द्वारा सत्यापन प्रोटोकॉल में ढील दिए जाने के बाद SIR नोटिस प्राप्त करने वाले 33 लाख दिल्ली मतदाताओं में से 60% से अधिक का सत्यापन हो चुका है। इन विशिष्ट विध्वंसों के कारण बिहार के व्यवसायों के लिए निवेश या नौकरी के नुकसान के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
