पटना, 12 अक्टूबर 2026: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के युवाओं को कुशल बनाने के उद्देश्य से पटना और मुजफ्फरपुर में दो नए कौशल केंद्र स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। यह घोषणा 8 अक्टूबर, 2026 को लघु उद्योग भारती (LUB) के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के दौरान की गई।
लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय संगठन सचिव प्रकाश चंद्र, अखिल भारतीय संयुक्त सचिव नरेश पारिख, बिहार प्रदेश अध्यक्ष श्याम सुंदर भीमसरिया और अन्य राज्य पदाधिकारी शामिल थे। इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें भूमि आवंटन नीति में सुधार, औद्योगिक भूमि को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में परिवर्तित करना (यानी, किराए पर ली गई भूमि का स्थायी स्वामित्व प्रदान करना), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन, रखरखाव शुल्क की समाप्ति, एक निकास नीति का कार्यान्वयन और निष्क्रिय औद्योगिक इकाइयों के लिए एक माफी योजना शामिल थी।
ये कौशल केंद्र राज्य के युवाओं को आधुनिक औद्योगिक मांगों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करके पारंपरिक विशेषज्ञता और नई जरूरतों के बीच के अंतर को पाटेंगे। इससे MSME क्षेत्र के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार होगा।
यह विकास बिहार में व्यापार, MSME, व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार MSME विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। हाल ही में, लगभग 9 अक्टूबर, 2026 को बिहार MSME नीति-2026 की शुरुआत की गई है, जिसका लक्ष्य औद्योगिक विकास को गति देना है। इसके अतिरिक्त, बिहार लघु उद्यमी योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए ₹2 लाख का अनुदान प्रदान करती है, जबकि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना उद्यमियों को ₹10 लाख तक (जिसमें ₹5 लाख का ऋण घटक शामिल है) की सहायता देती है। राज्य सरकार का लक्ष्य 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाना है।
सरकार की इन पहलों, जैसे 36 लाइसेंस/अनुमोदन के लिए एक पोर्टल का शुभारंभ (जिसे LUB ने 24 सितंबर, 2026 को सराहा था) और LUB की मांगों को पूरा करने की प्रतिबद्धता, का उद्देश्य बिहार में व्यापार करने में आसानी को बढ़ाना है। ये सभी प्रयास मिलकर एक उद्यमी-अनुकूल वातावरण बनाने, बेरोजगारी कम करने और पूरे राज्य में औद्योगिक विकास में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
