बिहार सरकार उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल कर रही है

ThisNews Desk
बिहार सरकार उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल कर रही है
चित्र: Medhat Ayad / Pexels

बिहार में उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ESDP) का पूरा लाभ उठाने में अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ापन देखा जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में, बिहार में ESDP के तहत केवल 9,138 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 629,784 था। इस धीमी प्रगति के मुख्य कारण युवाओं में उद्यमिता के प्रति कम रुझान, औद्योगिक-प्रशासनिक जड़ता (औद्योगिक क्षेत्र और सरकारी प्रशासन में धीमी गति या परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध) और स्थानीय रोजगार के अवसरों की कमी हैं।

इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने 2026 में कई महत्वपूर्ण योजनाएं और नीतियां शुरू की हैं। इनमें प्रमुख है "मुख्यमंत्री उद्यमी योजना 2026", जिसके तहत महत्वाकांक्षी उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसमें 50% सब्सिडी (अधिकतम 5 लाख रुपये, जो सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता है जिसे चुकाना नहीं पड़ता) और कुछ श्रेणियों के लिए ब्याज-मुक्त ऋण शामिल है, जबकि सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए 1% साधारण ब्याज (केवल मूल राशि पर लगने वाला ब्याज) पर ऋण उपलब्ध है। इस योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 25 फरवरी, 2026 को शुरू होकर 15 मार्च, 2026 को बंद हो गया था, जिसे बाद में 25 मार्च, 2026 तक बढ़ाया गया। इस वर्ष ई-लॉटरी प्रणाली (इलेक्ट्रॉनिक रूप से आयोजित एक निष्पक्ष, यादृच्छिक चयन प्रक्रिया) के माध्यम से 9,347 लाभार्थियों को सहायता देने का लक्ष्य है।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार बिहार MSME नीति 2026 का मसौदा तैयार कर रही है। इस नीति का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ MSME इकाइयों को औपचारिक बनाना (पंजीकृत न हुए छोटे व्यवसायों को आधिकारिक आर्थिक प्रणाली में लाना ताकि उन्हें लाभ और सहायता मिल सके) और एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना है। MSME का अर्थ है सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, जो छोटे व्यवसाय होते हैं और रोजगार सृजन तथा आर्थिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। उद्योग विभाग के तहत MSME निदेशालय द्वारा तैयार की जा रही यह नीति बिहार को एक औद्योगिक और उद्यमिता केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है। इसी कड़ी में, जून 2026 में गया में 170 करोड़ रुपये की लागत से एक MSME प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन किया गया है। बिहटा (पटना) में एक और केंद्र और मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर में चार विस्तार केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 को भी 31 दिसंबर, 2026 तक या नई औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 के लागू होने तक बढ़ा दिया गया है। नई औद्योगिक नीति का मसौदा तैयार करने में आईआईएम बोधगया भी शामिल है।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा "बेटी स्टार्टअप चैलेंज" नामक एक प्रस्तावित योजना भी है, जो युवा महिलाओं के अभिनव व्यावसायिक विचारों के लिए 50,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी। "लेट्स इंस्पायर बिहार" द्वारा आयोजित बिहार विकास शिखर सम्मेलन 2026 में भी जिला-स्तरीय उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र और रोजगार सृजन पर जोर दिया गया।

ये पहल बिहार के व्यवसायों, MSME, व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका उद्देश्य औद्योगिक विकास, कौशल विकास और स्वरोजगार के लिए अनुकूल माहौल बनाना है। इससे काम के लिए पलायन कम होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य हर परिवार में कम से कम एक उद्यमी तैयार करना है।

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