छपरा की रेणु देवी ने सरकारी योजनाओं की मदद से एक सफल मसाला उत्पादन इकाई स्थापित की है। यह इकाई न केवल उन्हें अच्छी आय दे रही है, बल्कि चार स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार प्रदान कर रही है। रेणु देवी की यह कहानी बिहार में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सरकारी समर्थन के महत्वपूर्ण प्रभाव को दर्शाती है। यह उन छोटे व्यवसाय मालिकों और ठेकेदारों के लिए एक प्रेरणा है जो अपने उद्यम शुरू करने की सोच रहे हैं।
बिहार सरकार महिलाओं के बीच स्वरोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए सक्रिय रूप से कई योजनाएं चला रही है। इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शामिल हैं, जिनका प्रबंधन बिहार सरकार का उद्योग विभाग करता है। ये योजनाएं ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद करती हैं।
मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना के तहत, नए व्यवसाय स्थापित करने के लिए ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस सहायता में ₹5 लाख तक का गैर-वापसी योग्य अनुदान (ग्रांट) शामिल है, जिसका अर्थ है कि इसे वापस नहीं चुकाना होता। शेष ₹5 लाख तक का ब्याज-मुक्त ऋण होता है, जिस पर कोई ब्याज नहीं लगता। इसके अतिरिक्त, लाभार्थियों को अपने उद्यमशीलता कौशल को निखारने के लिए अनिवार्य कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जो उन्हें व्यवसाय चलाने में मदद करता है।
जनवरी 2026 में, बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की। पहले ₹10,000 की शुरुआती सहायता को बढ़ाकर ₹2 लाख तक कर दिया गया है। इसके अलावा, लाभार्थियों के कार्य मॉडल के प्रदर्शन और मूल्यांकन के आधार पर छह महीने बाद अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत वित्तीय सहायता की दूसरी किस्त फरवरी 2026 से वितरित की जानी थी, जो लाभार्थियों को उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
इन सरकारी कार्यक्रमों का प्राथमिक उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसका एक बड़ा लाभ यह भी है कि यह ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को कम करने में मदद करता है। रेणु देवी का सफल उद्यम, जो चार महिलाओं को रोजगार दे रहा है, इस बात का एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे ये योजनाएं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को बढ़ावा देने, छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाने और बिहार में श्रमिकों के लिए नए रोजगार सृजित करने में सहायक हैं। वित्तीय सहायता और कौशल विकास का प्रावधान बिहार के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए एक मजबूत और टिकाऊ उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
