बिहार सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए भूमि अधिग्रहण नियमों में सुधार किए

ThisNews Desk
बिहार सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए भूमि अधिग्रहण नियमों में सुधार किए
चित्र: Normunds Ispwich / Pexels

बिहार सरकार ने 2026 में राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत भूमि-संबंधी प्रावधानों में संशोधन किया है। इन संशोधनों का प्राथमिक उद्देश्य अधिकतम भूमि सीमा निर्धारित करने और अतिरिक्त भूमि (सरप्लस लैंड) का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया को सरल और अधिक कुशल बनाना है।

यह पहल बिहार के छोटे व्यवसाय मालिकों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरलता आने से नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विकास और मौजूदा व्यवसायों के विस्तार के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता काफी आसान हो जाएगी। पहले, भूमि अधिग्रहण से संबंधित जटिल नियम और लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाएं अक्सर परियोजनाओं में अनावश्यक देरी का कारण बनती थीं, जिससे निवेशकों और व्यवसायों को वित्तीय नुकसान और परिचालन संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता था।

'जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026' मूल रूप से भारत की संसद द्वारा पारित केंद्रीय जन विश्वास अधिनियम का ही एक राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन है। इस अधिनियम के तहत किए गए भूमि-संबंधी संशोधन यह सुनिश्चित करेंगे कि सरकार उन भूमियों को अधिक कुशलता से अधिग्रहित कर सके जो निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक हैं। यहां 'अधिकतम भूमि सीमा' का अर्थ है वह अधिकतम क्षेत्रफल जो कोई व्यक्ति या संस्था कानूनी रूप से अपने पास रख सकती है; इससे अधिक भूमि को 'अतिरिक्त' या 'सरप्लस' माना जाता है। सरकार ऐसी अतिरिक्त भूमि का उपयोग विभिन्न सार्वजनिक उद्देश्यों, जैसे कि औद्योगिक पार्क स्थापित करना, सड़कें बनाना, या अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को साकार करने के लिए कर सकती है। यह प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक तेज और सीधी होगी।

इन सुधारों से राज्य में निवेश का माहौल काफी बेहतर होने की उम्मीद है। जब भूमि आसानी से उपलब्ध होती है और अधिग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी तथा तेज होती है, तो नए उद्योग स्थापित करने और मौजूदा व्यवसायों का विस्तार करने में रुचि रखने वाले उद्यमी और निवेशक अधिक आकर्षित होते हैं। यह अंततः बिहार में रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान करेगा। विशेष रूप से, छोटे और मध्यम उद्यम (MSMEs) इन परिवर्तनों से अत्यधिक लाभान्वित होंगे, क्योंकि उन्हें अपनी विस्तार योजनाओं के लिए भूमि प्राप्त करने में कम बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। यह बिहार को एक अधिक उद्योग-अनुकूल और व्यापार-अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है।

MSME / लघु उद्योग में और पढ़ें