बिहार सरकार ने राज्य को नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी निवेश रोडमैप की घोषणा की है। देर से 2026 में किए गए इन महत्वपूर्ण घोषणाओं के अनुसार, राज्य में बिजली उत्पादन, पारेषण (बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया), वितरण (बिजली को अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने) और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के रखरखाव में कुल 2,57,316 करोड़ रुपये (लगभग ₹2.57 लाख करोड़) का व्यापक निवेश किया जाएगा। यह विशाल निवेश योजना बिहार के छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए अभूतपूर्व व्यावसायिक अवसर पैदा करने के लिए तैयार है।
इस दूरदर्शी निवेश रोडमैप का मुख्य लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 6 गीगावाट-घंटे (GWh) ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करना है। गीगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता को मापने की इकाई है, जबकि गीगावाट-घंटे ऊर्जा भंडारण की क्षमता को दर्शाता है, यानी कितनी बिजली स्टोर की जा सकती है। ये लक्ष्य बिहार को स्वच्छ और हरित ऊर्जा के उत्पादन और उपयोग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जिससे राज्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार, जिन्हें बुलू मंडल के नाम से भी जाना जाता है, और ऊर्जा सचिव अजय यादव ने इन महत्वपूर्ण घोषणाओं को कई प्रमुख मंचों पर साझा किया। इनमें नई दिल्ली में 2 से 5 नवंबर, 2026 तक आयोजित भारत आरई शिखर सम्मेलन और एक्सपो 2026, और पटना में आयोजित राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट-2026 शामिल हैं। इन आयोजनों में देश भर के प्रमुख निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया, जिससे बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली।
यह विशाल निवेश योजना केवल ऊर्जा उत्पादन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव भी पड़ेगा। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास और रखरखाव में स्थानीय ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सौर पैनलों की स्थापना, पवन ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण, बैटरी भंडारण प्रणालियों का विकास और संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसे कार्यों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह बिहार की अर्थव्यवस्था को गति देगा और विशेष रूप से छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा, जिससे राज्य के समग्र आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। यह निवेश बिहार को हरित ऊर्जा क्रांति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।
