बिहार के छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। पटना रिंग रोड नेटवर्क के एक अहम हिस्से, रामनगर-कच्ची दरगाह छह-लेन कॉरिडोर को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार पथ निर्माण विभाग ने यह समय सीमा निर्धारित की है। यह 14.5 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-131G) के तहत इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर विकसित किया जा रहा है। EPC मोड का अर्थ है कि ठेकेदार परियोजना के डिज़ाइन, आवश्यक सामग्री की खरीद और निर्माण तीनों की जिम्मेदारी लेता है।
इस रामनगर-कच्ची दरगाह कॉरिडोर की अनुमानित लागत 1,183 करोड़ रुपये है। पूरे पटना रिंग रोड परियोजना की बात करें तो यह लगभग 150 किलोमीटर लंबी है और इसे आठ चरणों में विकसित किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 15,000 करोड़ रुपये से 16,000 करोड़ रुपये के बीच है। जून 2026 में केंद्र सरकार ने इसके आठवें और अंतिम अलाइनमेंट (दीघवारा-सराय) को मंजूरी देकर परियोजना को बड़ी गति प्रदान की थी।
बिहार पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा की है और अधिकारियों को निर्माण कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विशेष सचिव डॉ. शैलजा शर्मा भी इन समीक्षा बैठकों में शामिल रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) भी पटना रिंग रोड के विभिन्न खंडों में एक प्रमुख एजेंसी के रूप में शामिल है।
सितंबर और अक्टूबर 2026 के अंत तक, बिहार पथ निर्माण विभाग रामनगर-कच्ची दरगाह कॉरिडोर की प्रगति की सक्रिय रूप से समीक्षा कर रहा है, जिसमें समय पर पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। जबकि रामनगर-कच्ची दरगाह खंड का लक्ष्य 2028 है, पटना रिंग रोड के अन्य हिस्से विभिन्न चरणों में हैं। उदाहरण के लिए, कन्हौली और रामनगर के बीच 39.16 किलोमीटर का खंड पूरा हो चुका है। कच्ची दरगाह-बिदुपुर परियोजना, जो 19.76 किलोमीटर लंबा छह-लेन ग्रीनफील्ड पुल कॉरिडोर है, का पहला 4.57 किलोमीटर का चरण जून 2025 में खोला गया था, जबकि शेष खंड फरवरी और मई 2026 तक निर्माणाधीन हैं। शेरपुर-दीघवारा खंड, जो 14.52 किलोमीटर लंबा छह-लेन पुल है, में अगस्त 2026 तक 20.60% भौतिक प्रगति दर्ज की गई है। कुछ खंडों के लिए भूमि अधिग्रहण जारी है, जुलाई 2026 में कन्हौली और पैनाल गांवों में भूमि के लिए धारा 3डी अधिसूचना जारी की गई थी।
यह परियोजना बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। पटना रिंग रोड का उद्देश्य लंबी दूरी और भारी वाहनों को शहर की सड़कों से हटाकर पटना के भीतर यातायात की भीड़ को कम करना है। इस बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रा का समय और ईंधन की खपत कम होने की उम्मीद है, जिससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स (सामानों के परिवहन और वितरण) को सीधा लाभ मिलेगा। रिंग रोड तेजी से अंतर-जिला कनेक्शन बनाएगा और उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संबंधों को बढ़ाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा और शहरी विस्तार का समर्थन होगा। इससे आवास, औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक्स हब (माल ढुलाई और वितरण केंद्र) में निवेश के अवसर खुलने और आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे राज्य की समग्र समृद्धि में योगदान मिलेगा।
