बिहार मशरूम उत्पादन में अग्रणी राज्य बना, एक दशक में 92.62% की वृद्धि

ThisNews Desk
बिहार मशरूम उत्पादन में अग्रणी राज्य बना, एक दशक में 92.62% की वृद्धि
चित्र: Peter Vercoelen / Pexels

बिहार मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है, जिसने देश के कुल उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह उपलब्धि राज्य के छोटे व्यवसाय मालिकों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बिहार का मशरूम उत्पादन 2013-14 में मात्र 60 टन से बढ़कर 2023-24 में 42,000 टन हो गया है। यह एक दशक में 92.62% की असाधारण चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है।

चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) एक महत्वपूर्ण वित्तीय शब्द है जो यह बताता है कि किसी निवेश या व्यवसाय का मूल्य एक निश्चित अवधि में सालाना औसतन कितनी दर से बढ़ा है। यह दर किसी व्यवसाय की दीर्घकालिक विकास क्षमता को समझने में मदद करती है। बिहार के मशरूम उत्पादन में यह उच्च CAGR दर्शाता है कि यह क्षेत्र तेजी से फल-फूल रहा है, जो नए उद्यमियों के लिए आकर्षक संभावनाएँ प्रस्तुत करता है।

यह वृद्धि 2024-25 में और भी बढ़कर लगभग 44,930 मीट्रिक टन तक पहुँच गई है, जो राज्य में इस कृषि व्यवसाय की निरंतर सफलता को रेखांकित करती है। 2023-24 में, बिहार ने भारत के कुल मशरूम उत्पादन का 12.02% हिस्सा उत्पादित किया, जिससे देश में इसकी अग्रणी स्थिति और मजबूत हुई है। यह आंकड़ा बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर मशरूम उत्पादन में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।

मशरूम की खेती, जिसे अक्सर 'सफेद क्रांति' के रूप में देखा जाता है, बिहार के किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए एक लाभदायक विकल्प साबित हुई है। यह कम जगह और कम समय में अधिक आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है। राज्य में मशरूम की बढ़ती मांग और इसके प्रसंस्करण (processing) से जुड़े व्यवसायों के विकास की संभावनाएँ छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों (MSMEs) के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

इस उल्लेखनीय वृद्धि ने बिहार को कृषि क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है, जो राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह सफलता न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और पोषण में भी योगदान दे रही है। बिहार की यह प्रगति अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन सकती है कि कैसे कृषि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक विकास को गति दी जा सकती है।

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