बिहार में शहरों के लिए कस्टमाइज्ड मास्टर प्लान, व्यवसायों के लिए खुलेंगे नए अवसर

ThisNews Desk
बिहार में शहरों के लिए कस्टमाइज्ड मास्टर प्लान, व्यवसायों के लिए खुलेंगे नए अवसर
चित्र: Anil Sharma / Pexels

बिहार सरकार ने शहरी विकास के लिए एक नई रणनीति अपनाई है, जिसके तहत शहरों के लिए विशेष 'मास्टर प्लान' तैयार किए जा रहे हैं। शहरी विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने 2 सितंबर, 2026 को पटना में एक कार्यशाला में बताया कि अब शहरों का विकास उनकी स्थानीय भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियों और विरासत को ध्यान में रखकर किया जाएगा, न कि किसी सामान्य मॉडल पर। मास्टर प्लान एक लंबी अवधि की योजना होती है जो शहर के विकास, भूमि उपयोग और बुनियादी सुविधाओं को निर्देशित करती है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य शहरों को संतुलित, समावेशी और टिकाऊ बनाना है, जिससे जीवन की गुणवत्ता और 'ईज ऑफ लिविंग' (जीवनयापन में आसानी) बेहतर हो। बिहार 43 शहरों के लिए मास्टर प्लान बना रहा है और 12 नए 'सैटेलाइट टाउनशिप' (बड़े शहर के पास विकसित छोटे शहर) विकसित कर रहा है। शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आवास और शहरी विकास निगम (हुडको) से 1 लाख करोड़ रुपये की 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (ऋण सुविधा) का समझौता भी हुआ है। प्रधान सचिव विनय कुमार ने जीआईएस-आधारित योजना और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया।

अप्रैल 2026 में, कैबिनेट ने नियोजित विस्तार के लिए चिह्नित टाउनशिप क्षेत्रों में भूमि खरीद, बिक्री, हस्तांतरण और निर्माण जैसी गतिविधियों पर 31 मार्च, 2027 तक (पटना, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर के लिए) और 30 जून, 2027 तक (मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी के लिए) 'मोरेटोरियम' (अस्थायी रोक) लगा दी है। यह कदम मास्टर प्लान-आधारित विकास सुनिश्चित करने के लिए है। पाटिलपुत्र (पटना), हरिहरनाथपुरम (सोनपुर) और मगध (गया) सहित 11 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जोनल और मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

जुलाई 2026 में, मंत्री नीतीश मिश्रा ने घोषणा की कि दिसंबर 2028 तक हर शहरी स्थानीय निकाय (नगर निगम/नगर परिषद जैसे स्थानीय प्रशासन) में 1-2 किलोमीटर की 'सिग्नेचर रोड' (विशेष सड़क) विकसित की जाएगी, जिसमें चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण और आधुनिक स्ट्रीट लाइटिंग शामिल होगी। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यवसायों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। बिहार विधानसभा ने नियोजित शहरी विस्तार के लिए बिहार शहरी विकास प्राधिकरण (बीयूडीए) की स्थापना हेतु बिहार शहरी विकास विधेयक, 2026 भी पारित किया है।

व्यवसायों, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों), व्यापारियों और उद्यमियों के लिए ये पहलें महत्वपूर्ण हैं। नियोजित शहरीकरण, सैटेलाइट टाउनशिप और वाणिज्यिक हब नए आर्थिक केंद्र बनाएंगे और रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। 'सिग्नेचर रोड' और वेंडिंग जोन स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा देंगे। पटना नगर निगम ने सितंबर 2026 में विश्व बैंक की सहायता से 530.09 करोड़ रुपये की तीन वाणिज्यिक परिसरों सहित 93 विकास योजनाओं को मंजूरी दी है, जो कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना, भोजन और मनोरंजन सुविधाएं प्रदान करेंगे।

सरकार नए भवन उपनियम 2026 भी तैयार कर रही है, जिससे निर्माण अनुमोदन प्रक्रियाएं सरल होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेश में आसानी होगी, जिससे 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यवसाय करने में आसानी) बेहतर होगा। जून 2026 में, गया के खिजरसराय में 170 करोड़ रुपये और बिहटा (पटना) में 171 करोड़ रुपये के एमएसएमई प्रौद्योगिकी केंद्र, साथ ही चार विस्तार केंद्र का उद्घाटन किया गया। ये केंद्र एमएसएमई के विकास को बढ़ावा देंगे, जिससे सटीक जॉब वर्क, कपड़ा परीक्षण, औद्योगिक प्रशिक्षण और कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं की मांग बढ़ेगी। जुलाई 2026 में सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए जारी बिहार एमएसएमई नीति 2026 का मसौदा उद्यमिता, निजी निवेश और नवाचार को बढ़ावा देकर बिहार को एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है।

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