बिहार कैबिनेट ने 'बिहार हरित हाइड्रोजन नीति, 2026' को दी मंजूरी

ThisNews Desk
बिहार कैबिनेट ने 'बिहार हरित हाइड्रोजन नीति, 2026' को दी मंजूरी
चित्र: Lorna Pauli / Pexels

बिहार कैबिनेट ने 30 सितंबर, 2026 को ऐतिहासिक 'बिहार हरित हाइड्रोजन नीति, 2026' को अपनी मंजूरी दे दी है। यह दूरदर्शी नीति राज्य को एक हरित अर्थव्यवस्था (ग्रीन इकोनॉमी) की ओर ले जाने, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करने, नए निवेश को आकर्षित करने और स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) के उपयोग को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्यों के साथ लाई गई है। यह बिहार के आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस नीति का प्राथमिक लक्ष्य हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना है। हरित हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जिसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, जैसे सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा, का उपयोग करके पानी से बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में कोई हानिकारक कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, जिससे यह पर्यावरण के लिए बेहद स्वच्छ ऊर्जा स्रोत बन जाता है। इस नीति के माध्यम से, बिहार नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के क्षेत्र में अपनी क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करना चाहता है। नवीकरणीय ऊर्जा वे प्राकृतिक स्रोत हैं जो कभी खत्म नहीं होते और लगातार उपलब्ध रहते हैं, जैसे सूर्य की रोशनी और हवा।

'बिहार हरित हाइड्रोजन नीति, 2026' का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य आयातित प्राकृतिक गैस पर राज्य की निर्भरता को कम करना है। वर्तमान में, ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें अक्सर दूसरे देशों से प्राकृतिक गैस खरीदनी पड़ती है, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था पर वित्तीय बोझ पड़ता है। हरित हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देकर, बिहार अपनी ऊर्जा सुरक्षा बढ़ा सकता है और इस आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। इसके साथ ही, यह नीति राज्य भर में कार्बन उत्सर्जन (कार्बन एमिशन) को काफी कम करने में सहायक होगी। कार्बन उत्सर्जन वे हानिकारक गैसें हैं जो उद्योगों और वाहनों से निकलती हैं और वातावरण को प्रदूषित करती हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

छोटे व्यवसाय मालिकों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए यह नीति नए और रोमांचक अवसर लेकर आएगी। हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से संबंधित नए उद्योगों और सेवाओं का विकास होगा। इससे नए व्यवसाय शुरू करने, मौजूदा व्यवसायों का विस्तार करने और तकनीकी कौशल वाले लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने की संभावना है। यह नीति बिहार को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और उपयोग के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे राज्य के आर्थिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।

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