बिहार विद्युत नियामक आयोग (BERC) ने राज्य के लिए अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्व (RPO) विनियमों में संशोधन के मसौदे पर कार्यवाही शुरू कर दी है। इस मसौदे में चरणबद्ध तरीके से ऊर्जा भंडारण दायित्व (ESO) लागू करने का प्रस्ताव है। इस मसौदे का शीर्षक "बीईआरसी (अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्व, इसका अनुपालन और आरईसी फ्रेमवर्क कार्यान्वयन) (पहला संशोधन) विनियम, 2026" है।
छोटे व्यवसाय मालिकों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये बदलाव क्या मायने रखते हैं। अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्व (RPO) का मतलब है कि बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) और बड़े बिजली उपभोक्ताओं को अपनी कुल बिजली खपत का एक निश्चित प्रतिशत सौर, पवन या अन्य नवीकरणीय स्रोतों से खरीदना अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण में योगदान करना है।
अब, प्रस्तावित ऊर्जा भंडारण दायित्व (ESO) एक नया कदम है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे सौर और पवन ऊर्जा हमेशा एक समान बिजली पैदा नहीं कर सकते – उदाहरण के लिए, रात में सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती और हवा हमेशा नहीं चलती। ऐसे में बिजली की आपूर्ति में स्थिरता बनाए रखने के लिए ऊर्जा को स्टोर करना आवश्यक हो जाता है। ऊर्जा भंडारण दायित्व का अर्थ है कि बिजली कंपनियों और बड़े उपभोक्ताओं को अपनी नवीकरणीय ऊर्जा का एक निश्चित हिस्सा स्टोर भी करना होगा। यह संग्रहीत ऊर्जा तब काम आएगी जब नवीकरणीय स्रोत से सीधे बिजली उपलब्ध न हो, जिससे बिजली की आपूर्ति अधिक विश्वसनीय और निरंतर बनी रहेगी।
यह चरणबद्ध ऊर्जा भंडारण दायित्व बिहार में ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता को मजबूत करने में मदद करेगा। इससे राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश और व्यापार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं, खासकर ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों (जैसे बैटरी) और संबंधित सेवाओं में। यह प्रस्ताव अभी मसौदा चरण में है, और आयोग इस पर आगे की कार्यवाही करेगा।
