बिहार में पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा डिजिटल और आधारभूत संरचना का बड़ा बढ़ावा: ₹10,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं

ThisNews Desk
बिहार में पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा डिजिटल और आधारभूत संरचना का बड़ा बढ़ावा: ₹10,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं
चित्र: Leeloo The First / Pexels

बिहार सरकार राज्य के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर लाने के लिए डिजिटल सुविधाओं और प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक को एकीकृत करके और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाकर बिहार को एक प्रमुख पर्यटन स्थल में बदलना है।

विश्व पर्यटन दिवस (27 सितंबर, 2026) के अवसर पर, बिहार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने इस क्षेत्र के विकास के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक और हेली-पर्यटन के उपयोग पर विशेष ध्यान देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रशासन का लक्ष्य पर्यटन को समग्र विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास से जोड़ना है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पर्यटन विकास हेतु ₹1,301 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसके अतिरिक्त, 'प्रगति यात्रा 2025' पहल के तहत ₹2,710.31 करोड़ की कुल 36 प्राथमिकता वाली परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। हाल ही में, बिहार कैबिनेट ने विशेष रूप से गया में पर्यटन आधारभूत संरचना को बढ़ाने के लिए ₹3,516 करोड़ के महत्वपूर्ण निवेश को मंजूरी दी है।

राज्य के विभिन्न जिलों में कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं: सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माता सीता को समर्पित एक भव्य मंदिर ₹1,000 करोड़ से अधिक के निवेश से बनाया जा रहा है। गया में ₹2,500 करोड़ की अनुमानित लागत से विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है, जबकि बोधगया में ₹165 करोड़ की लागत से एक बौद्ध ध्यान और अनुभव केंद्र की योजना है। सोनपुर में हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर का विकास ₹680 करोड़ से अधिक के निवेश से किया जा रहा है। सहरसा में मत्स्यगंधा झील पर एक ग्लास ब्रिज और वाल्मीकिनगर में एक लव-कुश पार्क जैसी अन्य परियोजनाएं 2026-27 तक पूरी होने का लक्ष्य है।

बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) इन पहलों में सक्रिय रूप से शामिल है। राज्य ने धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों तक कनेक्टिविटी में सुधार के लिए 13 जुलाई, 2026 को मुख्यमंत्री बिहार हेली-पर्यटन और वायु पर्यटन सेवा योजना भी शुरू की।

ये विकास बिहार के छोटे व्यवसायों (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम - MSMEs), ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में 20 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना है, साथ ही एक लाख लोगों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करना है। 'मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना' जैसी योजनाएं, जो 34 पर्यटन स्थलों पर लगभग 1,000 कमरे विकसित करने के लिए प्रति इकाई ₹11 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, सीधे स्थानीय आय और उद्यमिता को बढ़ावा देती हैं। बेहतर आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाएं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय सेवाओं की मांग बढ़ने, आतिथ्य और खुदरा क्षेत्र में रोजगार पैदा होने और बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री राम चंद्र प्रसाद ने 13 जुलाई, 2026 को "इकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट-2026" का भी उद्घाटन किया, ताकि पर्यावरण-पर्यटन में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके; हाल के वर्षों में ऐसे स्थलों के विकास पर ₹500 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।

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