बिहार में 1000 खनन सिपाहियों की होगी भर्ती, अवैध खनन पर लगेगी लगाम

S Sakar(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 1:55 pm बजे)
बिहार में 1000 खनन सिपाहियों की होगी भर्ती, अवैध खनन पर लगेगी लगाम
चित्र: Robert So / Pexels

बिहार सरकार ने अवैध खनन, खनिजों के परिवहन और उनके अवैध भंडारण पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने 6 अगस्त, 2026 को घोषणा की कि विभाग में 1,000 'खनन सिपाही' (माइनिंग कांस्टेबल) की भर्ती की जाएगी। यह पहल राज्य में खनिज संसाधनों के अवैध दोहन को रोकने और वैध व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य खान एवं भूतत्व विभाग के लिए एक समर्पित प्रवर्तन विंग (enforcement wing) का गठन करना है। यह विंग मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग की तर्ज पर काम करेगा, जिससे खनन सिपाही स्थानीय पुलिस पर निर्भर हुए बिना स्वतंत्र रूप से छापेमारी और कार्रवाई कर सकेंगे। अवैध खनन से न केवल सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होता है, बल्कि यह पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुँचाता है। इसके साथ ही, वैध तरीके से खनन कार्य करने वाले छोटे व्यवसायी, ठेकेदार और व्यापारी भी प्रभावित होते हैं। उन्हें अवैध रूप से खनन की गई सामग्री से अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका व्यवसाय प्रभावित होता है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।

इन खनन सिपाहियों की तैनाती से खनिज संसाधनों का अवैध दोहन रुकेगा, जिससे बाजार में पारदर्शिता आएगी और वैध कारोबारियों को समान अवसर मिलेंगे। यह कदम निर्माण क्षेत्र (construction sector) से जुड़े ठेकेदारों, बालू आपूर्तिकर्ताओं और अन्य उद्यमियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा, क्योंकि उन्हें अब उचित मूल्य पर और कानूनी तरीके से खनिज उपलब्ध हो सकेंगे।

इस विशेष पुलिस बल के गठन का प्रस्ताव सचिव स्तर पर अंतिम रूप दिया जा चुका है और वर्तमान में यह विधि विभाग (Law Department) के पास समीक्षाधीन है। इसके बाद इसे राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी। भर्ती के लिए पात्रता मानदंड (eligibility criteria) और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इन खनन सिपाहियों को पूरे बिहार में तैनात किया जाएगा, खासकर उन एक दर्जन से अधिक जिलों में जहां अवैध बालू खनन एक बड़ी समस्या है। इस पूरी प्रक्रिया में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव-सह-खान आयुक्त श्री अवनीश कुमार सिंह और निदेशक खान श्री मनीष कुमार मीणा जैसे अधिकारी शामिल हैं। यह कदम बिहार की अर्थव्यवस्था और वैध व्यवसायों के लिए एक सकारात्मक बदलाव लाने की उम्मीद है।

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