बिहार के शिवहर जिले के पुरनहिया प्रखंड के दोस्तिया गांव की निवासी आमना खातून ने अपनी उद्यमशीलता से एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। उन्होंने मात्र ₹40,000 के शुरुआती कर्ज को एक सफल लाख चूड़ी (लहठी) निर्माण व्यवसाय में बदल दिया है, जिसका वार्षिक कारोबार (कुल बिक्री) अब ₹15-20 लाख तक पहुंच गया है।
आमना खातून की यह यात्रा 2017 में आला हजरत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ने के बाद शुरू हुई। स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को छोटे-छोटे कर्ज और सामूहिक सहयोग के माध्यम से सशक्त बनाता है। उन्होंने 2020 में पारंपरिक लहठी चूड़ियां बनाना शुरू किया। समूह से लिए गए एक छोटे से कर्ज से शुरू हुआ उनका यह उद्यम अब सालाना ₹5-6 लाख का शुद्ध लाभ (सभी खर्चों के बाद बचा हुआ मुनाफा) कमा रहा है। उन्होंने समूह से लिए गए कुल ₹9.75 लाख के कर्ज को सफलतापूर्वक चुका दिया है। वर्तमान में, वह अपने व्यवसाय में ₹20-25 लाख का निवेश कर रही हैं और अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती हैं।
आमना खातून की इकाई में उनके गांव की लगभग 13 महिलाएं कार्यरत हैं, जिनमें 10 स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। यह उन्हें स्थिर रोजगार प्रदान करता है। उनकी इकाई द्वारा निर्मित लहठी चूड़ियां शिवहर और सीतामढ़ी शहरों में 25-30 से अधिक दुकानों में बेची जाती हैं। इसके अलावा, उनके उत्पाद पटना, दिल्ली, गुरुग्राम और वाराणसी जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच चुके हैं, और देवघर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मेलों में भी इनकी अच्छी मांग है।
ग्रामीण विकास विभाग (RDD) के अधिकारियों और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने आमना खातून की इस उपलब्धि को सराहा है। उन्होंने इसे बिहार में अन्य स्वयं सहायता समूह के सदस्यों और छोटे उद्यमियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उनकी सफलता पारंपरिक शिल्प कौशल, उद्यमशीलता और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ऋण तक पहुंच की क्षमता को दर्शाती है, जो बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह राज्य के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है, जिसमें उद्यमिता को बढ़ावा देना और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को मजबूत करना शामिल है, जैसा कि बिहार MSME नीति 2026 के मसौदे में भी रेखांकित किया गया है।
