RECP ने बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली ERES-47 ट्रांसमिशन परियोजना के लिए वैश्विक बोलियाँ आमंत्रित कीं

ThisNews Desk(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 4:43 pm बजे)
RECP ने बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली ERES-47 ट्रांसमिशन परियोजना के लिए वैश्विक बोलियाँ आमंत्रित कीं
चित्र: Dibakar Roy / Pexels

आरईसी लिमिटेड (विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के तहत) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (RECPDCL) ने ERES-47: नवादा-दुर्गापुर-जीरात (नया) 765kV अंतर-राज्यीय पारेषण गलियारा परियोजना के लिए वैश्विक बोलियां आमंत्रित की थीं। इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य पूर्वी क्षेत्र के बिजली ग्रिड को मजबूत करना और बिहार, पश्चिम बंगाल तथा कोलकाता क्षेत्र के लिए बिजली की विश्वसनीयता में सुधार करना है।

इस परियोजना के लिए RECPDCL को विद्युत मंत्रालय द्वारा 24 मार्च, 2026 को बोली प्रक्रिया समन्वयक नियुक्त किया गया था। प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP) 9 जून, 2026 को जारी किया गया था, जिसमें योग्य घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय डेवलपर्स को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 11 अगस्त, 2026 को दोपहर 3:00 बजे IST थी, और तकनीकी बोलियां उसी दिन दोपहर 3:30 बजे IST पर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण में खोली गईं। इस परियोजना के 31 मार्च, 2029 तक वाणिज्यिक संचालन में आने का लक्ष्य है।

ERES-47 परियोजना के मुख्य घटकों में बिहार के नवादा में एक नया 765/400/220 kV सबस्टेशन, पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक नया 765kV स्विचिंग स्टेशन और नवादा में मौजूदा गया-बलिया 765kV सिंगल सर्किट लाइन का लाइन-इन-लाइन-आउट (LILO) शामिल है। इसमें नवादा को दुर्गापुर और दुर्गापुर को जीरात से जोड़ने वाली नई 765kV डबल सर्किट लाइनों का निर्माण भी शामिल है, साथ ही जीरात (नया) 765/400kV सबस्टेशन का विस्तार भी किया जाएगा। यह परियोजना 'निर्माण, स्वामित्व, संचालन और हस्तांतरण' (BOOT) मॉडल पर विकसित की जाएगी, जिसकी रियायती अवधि 35 वर्ष होगी। BOOT मॉडल का अर्थ है कि एक निजी इकाई बुनियादी ढांचे का निर्माण, स्वामित्व और संचालन एक निश्चित अवधि के लिए करेगी, जिसके बाद इसे सरकार को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इस परियोजना के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) का नाम "नवादा दुर्गापुर पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड" है।

बोलीदाताओं के लिए वित्तीय आवश्यकताओं में ₹5,00,000 प्लस 18% जीएसटी (या USD 7,000 प्लस जीएसटी) का गैर-वापसी योग्य RFP दस्तावेज़ शुल्क और ₹55.32 करोड़ का बोली बांड शामिल था। सफल बोलीदाता से ₹138.30 करोड़ की प्रदर्शन बैंक गारंटी की आवश्यकता होगी। बोली बांड एक प्रकार की वित्तीय गारंटी है जो यह सुनिश्चित करती है कि बोलीदाता अपनी बोली के प्रस्तावों का सम्मान करेगा। प्रदर्शन बैंक गारंटी यह सुनिश्चित करती है कि सफल बोलीदाता परियोजना को अनुबंध के अनुसार पूरा करेगा। उपलब्ध जानकारी में ERES-47 के लिए कुल अनुमानित परियोजना लागत का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है।

यह परियोजना बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राज्य के बिजली पारेषण बुनियादी ढांचे को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, जिससे बिजली की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में सुधार होगा। छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए इसका अर्थ अधिक स्थिर बिजली आपूर्ति और व्यापार संचालन में कम रुकावटें होंगी, जिससे आर्थिक विकास के लिए बेहतर माहौल बनेगा।

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