अजगैबीनाथ धाम ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट: भूमि अधिग्रहण में देरी, एएआई के पत्र का इंतजार

ThisNews Desk
अजगैबीनाथ धाम ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट: भूमि अधिग्रहण में देरी, एएआई के पत्र का इंतजार — प्रतीकात्मक तस्वीर
चित्र: Asad Photo Maldives / Pexels

बिहार के मुंगेर और भागलपुर के बीच प्रस्तावित अजगैबीनाथ धाम ग्रीनफील्ड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (एक नया हवाई अड्डा जो बिल्कुल नई जगह पर बनाया जाता है) परियोजना को भूमि अधिग्रहण में देरी का सामना करना पड़ रहा है। बिहार कैबिनेट द्वारा एक बड़े बजट को मंजूरी दिए जाने के बावजूद, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) से औपचारिक अधिग्रहण पत्र न मिलने के कारण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी भी रुकी हुई है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार कैबिनेट ने 15 जुलाई, 2026 को प्रस्तावित भागलपुर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का नाम आधिकारिक तौर पर "अजगैबीनाथ धाम ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट" कर दिया था। इस परियोजना के लिए, राज्य कैबिनेट ने भूमि अधिग्रहण (सार्वजनिक उपयोग के लिए निजी भूमि खरीदने की प्रक्रिया) हेतु 1329.58 करोड़ रुपये (13,29,58,70,089 रुपये) के अनुमानित मुआवजे को मंजूरी दी है। कुल 3145.2308 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसमें से 1720.1160 एकड़ मुंगेर जिले में और 1425.1148 एकड़ भागलपुर जिले में स्थित है।

परियोजना की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि भूमि अधिग्रहण के लिए वित्तीय आवंटन स्वीकृत होने के बावजूद, एएआई से आवश्यक औपचारिक संचार के बिना वास्तविक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। बिहार का नागरिक उड्डयन विभाग, एएआई और प्रभावित जिलों के कई भू-मालिक (रैयत) इस प्रक्रिया में शामिल मुख्य पक्ष हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐसे बुनियादी ढांचा (देश के विकास के लिए आवश्यक सड़कें, बिजली, हवाई अड्डे जैसी सुविधाएं) परियोजनाओं में तेजी लाने का निर्देश दिया है, जिसमें तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन (परियोजना की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन), मास्टर प्लान और भूमि अधिग्रहण को बिना किसी देरी के पूरा करना शामिल है।

यह हवाई अड्डा बिहार की व्यापक विमानन विस्तार रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें अजगैबीनाथ धाम और सोनपुर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के लिए पहले चरण में कुल 10,000 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। अजगैबीनाथ धाम हवाई अड्डे से क्षेत्रीय हवाई संपर्क में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे विशेष रूप से वार्षिक श्रावणी मेला के दौरान धार्मिक पर्यटन को लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, इस हवाई अड्डे से भागलपुर के प्रसिद्ध रेशम उद्योग, कृषि उत्पादों और अन्य स्थानीय वस्तुओं के व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच मिलेगी। यह परियोजना भागलपुर और मुंगेर में श्रमिकों और उद्यमियों के लिए हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने का भी अनुमान है, साथ ही आपदा प्रबंधन और चिकित्सा आपात स्थितियों के लिए क्षमताओं को भी बढ़ाएगी।

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