बिहार सरकार ने बक्सर से भागलपुर तक गंगा नदी के किनारे लगभग 400 किलोमीटर लंबा औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना का प्रस्ताव किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 3 नवंबर, 2026 को गंगा जल समझौते और बिहार की जल सुरक्षा पर केंद्रित एक कार्यक्रम के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस योजना के तहत, गंगा के दोनों किनारों पर सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिन्हें तटबंधों (नदी को ओवरफ्लो होने से रोकने वाले किनारे) और नदी के गाद निकालने (मिट्टी और रेत हटाने) के काम से सहारा मिलेगा। गाद निकालने से नदी की गहराई बनी रहेगी और इसका उपयोग भी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बक्सर और भागलपुर के बीच चुनिंदा स्थानों पर नई टाउनशिप (योजनाबद्ध शहरी बस्तियां) प्रस्तावित हैं, जिनमें नदी के सामने आवासीय संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू गंगा से निकाली गई गाद का उपयोग बुनियादी ढांचा (सड़कें, पुल आदि) विकास, विशेष रूप से सड़क निर्माण के लिए करना है। राज्य सरकार ने पहले ही एक गाद नीति तैयार कर ली है और इस सामग्री के उपयोग के लिए 12 दिसंबर, 2026 को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने का इरादा रखती है। नदी की स्थिति का आकलन करने और विकास कार्यों में सहायता के लिए नदी का हवाई सर्वेक्षण भी प्रस्तावित है।
यह औद्योगिक गलियारा बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, बुनियादी ढांचे में सुधार करना और नदी के किनारे शहरी विकास के अवसर पैदा करना है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना कनेक्टिविटी (जुड़ाव) को बढ़ाएगी और पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी। बेहतर कनेक्टिविटी और नए शहरी केंद्र एक एकीकृत विकास बेल्ट को बढ़ावा देंगे, जिससे निर्माण, लॉजिस्टिक्स (सामानों की ढुलाई और वितरण), आतिथ्य (होटल और रेस्तरां), रियल एस्टेट (संपत्ति) और सेवा क्षेत्रों में नए अवसर खुल सकते हैं। यह बिहार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य नदी संसाधनों का लाभ उठाकर बुनियादी ढांचे के विकास और समग्र आर्थिक विकास को गति देना है।
