पटना में जलवायु-स्मार्ट कृषि पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, 20 युवा किसानों को मिला कौशल

ThisNews Desk
पटना में जलवायु-स्मार्ट कृषि पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, 20 युवा किसानों को मिला कौशल
चित्र: Kemal Can / Pexels

पटना में 7 से 9 अक्टूबर, 2026 तक "जलवायु-स्मार्ट कृषि में युवाओं के लिए कौशल विकास" पर एक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी क्षेत्रीय अनुसंधान परिसर (ICAR-ERPC), पटना द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के तहत आयोजित किया गया था।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवा किसानों को वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर कृषि संबंधी सूचित निर्णय लेने और जलवायु-लचीली एवं टिकाऊ खेती की पद्धतियों को अपनाने के कौशल से लैस करना था। इसमें बिहार के नौ जिलों – पूर्णिया, वैशाली, बांका, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीवान, जमुई, पटना और बक्सर – से कुल 20 युवा किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में भारत मौसम विज्ञान विभाग की पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं, कृषि-मौसम संबंधी सलाह, एकीकृत कृषि प्रणालियों, फसलों और कीटों पर मौसम के प्रभाव, मौसम-आधारित फसल बीमा, जलवायु-अनुकूल सब्जी उत्पादन और पशुधन प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को मौसम की जानकारी प्राप्त करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइटों का उपयोग करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

ICAR-ERPC के निदेशक डॉ. अनूप दास ने बदलते जलवायु पैटर्न के बीच कृषि जोखिमों को कम करने और उत्पादकता बढ़ाने में वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमानों और कृषि-मौसम संबंधी सलाह की उपयोगिता पर जोर दिया। भूमि और जल प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने जल संसाधनों के कुशल उपयोग और मौसम पूर्वानुमान ऐप्स के नियमित उपयोग के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. संजीव कुमार और डॉ. मनीषा तामता ने इस कार्यक्रम का संचालन किया और सभी प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने पर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

यह पहल बिहार के कृषि क्षेत्र, उसके श्रमिकों और उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जलवायु-स्मार्ट कृषि में युवा किसानों के कौशल को बढ़ाकर, यह कार्यक्रम कृषि जोखिमों को कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, जिससे किसानों के लिए अधिक स्थिर आय सुनिश्चित होगी। यह कौशल विकास बिहार के कृषि को आधुनिक बनाने और जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर एक लचीली खाद्य प्रणाली बनाने के बड़े प्रयासों के अनुरूप है, जो एक मजबूत और कुशल कृषि क्षेत्र के माध्यम से कृषि मूल्य श्रृंखला में शामिल स्थानीय व्यवसायों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाएगा।

गौरतलब है कि बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक व्यापक कृषि कौशल विकास योजना को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत 328 बैचों में 9,840 किसानों और ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए ₹8 करोड़ आवंटित किए गए हैं। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में कौशल विकास को कितनी गंभीरता से ले रही है।

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