बिहार के मधुबनी जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से बाजरा उत्पाद प्रसंस्करण का एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह पहल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 के तहत की जा रही है, जिसका लक्ष्य प्रतिभागियों को विभिन्न बाजरा-आधारित उत्पाद जैसे बिस्कुट, नमकीन, दलिया और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ बनाने में कुशल बनाना है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को नए कौशल प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपनी आय बढ़ा सकें और अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधार सकें।
हाल ही में, 9 सितंबर, 2026 को मधुबनी की महिला एवं बाल विकास निगम की जिला परियोजना प्रबंधक हेमंत कुमार मंडल ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का गहन निरीक्षण किया। प्रभात खबर और जिला जनसंपर्क कार्यालय, मधुबनी सहित विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी और विभिन्न बाजरा उत्पाद तैयार करने में उनके द्वारा प्राप्त व्यावहारिक कौशल का आकलन करना था। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रशिक्षण उच्च मानकों का हो और महिलाएं वास्तव में बाजार में उपयोगी कौशल सीखें। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम को ग्राम विकास युवा ट्रस्ट, मधुबनी द्वारा सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया जा रहा है।
"आत्मनिर्भरता" का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी आजीविका कमाने और अपने वित्तीय निर्णयों को स्वयं लेने में सक्षम हो, जिससे उन्हें दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े। यह प्रशिक्षण महिलाओं को यही क्षमता प्रदान कर रहा है।
यद्यपि इस विशेष मधुबनी प्रशिक्षण के लिए विशिष्ट निवेश आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, बिहार में बाजरा को बढ़ावा देने के व्यापक संदर्भ में राज्य सरकार का महत्वपूर्ण समर्थन दिखाई देता है। बाजरा, जिसे अक्सर 'पोषक अनाज' कहा जाता है, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ किसानों और छोटे उद्यमियों के लिए भी आर्थिक अवसर प्रदान करता है। राज्य के चौथे कृषि रोड मैप का एक महत्वपूर्ण घटक, बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट्स वैल्यू चेन (बाजरा मूल्य श्रृंखला के लिए उत्कृष्टता केंद्र), के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹12.91 करोड़ का प्रावधान है। "मूल्य श्रृंखला" एक व्यावसायिक शब्द है जिसका अर्थ है किसी उत्पाद (जैसे बाजरा) को खेत से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया, जिसमें कटाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बिक्री जैसे सभी चरण शामिल होते हैं। यह केंद्र बाजरा से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
इसके अतिरिक्त, बिहार के कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पोषक अनाज मूल्य श्रृंखला विकास कार्यक्रम के लिए ₹1497.00099 लाख (लगभग ₹14.97 करोड़) की एक बड़ी राशि स्वीकृत की है। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार बाजरा उत्पादन और उसके प्रसंस्करण को एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि के रूप में देख रही है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल महिलाओं को नए कौशल सिखा रहा है, बल्कि उन्हें छोटे व्यवसाय शुरू करने या स्थानीय बाजारों में अपने उत्पाद बेचने के लिए भी तैयार कर रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल बिहार में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और कृषि-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
