नवादा-पावापुरी रेल परियोजना का विरोध, नालंदा-नवादा के किसान जमीन देने को तैयार नहीं

S Sakar(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 4:08 pm बजे)
नवादा-पावापुरी रेल परियोजना का विरोध, नालंदा-नवादा के किसान जमीन देने को तैयार नहीं
चित्र: Rahul Sapra / Pexels

बिहार के नवादा और नालंदा जिलों के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना, नवादा-पावापुरी रेल परियोजना को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे के अंब्रेला वर्क्स 2024-25 कार्यक्रम के तहत मंजूरी दे दी है। यह नई 25.1 किलोमीटर लंबी (कुछ रिपोर्टों में 23 किमी) रेल लाइन नवादा को नालंदा जिले के एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल पावापुरी से सीधे जोड़ेगी।

इस परियोजना की अनुमानित लागत 492.14 करोड़ रुपये है। हालांकि, यदि परियोजना का विस्तार किया जाता है या मार्ग में परिवर्तन होता है, तो कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह लागत 1420 करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है। यह परियोजना राजगीर, बोधगया और नालंदा विश्वविद्यालय जैसे अन्य धार्मिक और शैक्षिक स्थलों तक पहुंच में सुधार करेगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, नवादा सांसद विवेक ठाकुर और पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र इस परियोजना से जुड़े प्रमुख अधिकारी हैं। यह परियोजना ईसीआर के दानापुर मंडल के अंतर्गत आती है।

मार्च 2026 तक, नई रेल लाइन पर प्रारंभिक कार्य, जिसमें मिट्टी भराई और छोटे-बड़े पुलों का निर्माण शामिल है, शुरू हो चुका था। हालांकि, यह परियोजना स्थानीय किसानों के विरोध का सामना कर रही है। 22 जून, 2026 को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें प्रभावित भूस्वामियों को नालंदा के जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी के पास 30 दिनों के भीतर लिखित आपत्तियां दर्ज करने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद, 13 जुलाई, 2026 को, नालंदा जिले के गिरियक प्रखंड के किसानों ने 'रेलवे परियोजना संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा, गिरियक' के बैनर तले भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के खिलाफ एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन किया।

यह रेल परियोजना बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे धार्मिक पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे नवादा-नालंदा-राजगीर बेल्ट में सड़क यातायात की भीड़ कम होगी और यात्रा का समय भी बचेगा। पर्यटन के अलावा, यह परियोजना क्षेत्रीय व्यापार और उद्योग के लिए एक उत्प्रेरक (यानी, विकास को गति देने वाला) के रूप में कार्य करेगी। यह नवादा को एक प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ेगी और कादिरगंज के पारंपरिक रेशम उद्योग के लिए बेहतर बाजार पहुंच (यानी, उत्पादों को खरीदारों तक आसानी से पहुंचाना) प्रदान करेगी, जिससे भागलपुर के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे। इसके अतिरिक्त, यह राजाउली में प्रस्तावित 2000 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्र सहित बड़ी बुनियादी ढांचा पहलों का समर्थन करेगी। निर्माण चरण में पर्याप्त स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है, और बेहतर रेल कनेक्टिविटी इसके पूरा होने के बाद भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।

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