राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने सीवान जिले में मत्स्य पालन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए बिहार सरकार को ₹195 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया है। यह वित्तीय सहायता मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) के तहत प्रदान की गई है।
यह घोषणा 25 से 30 सितंबर, 2026 के आसपास की गई थी, जिसमें 25 सितंबर और 1 अक्टूबर, 2026 जैसी तारीखों पर स्वीकृति की पुष्टि करने वाली रिपोर्टें सामने आईं। इस परियोजना का कार्यान्वयन बिहार के मत्स्य पालन, डेयरी और पशु संसाधन विभाग द्वारा किया जाएगा। नाबार्ड के बिहार क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने बताया कि इस सहायता का उद्देश्य सीवान में एक आधुनिक, समावेशी और टिकाऊ मत्स्य पालन पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
स्वीकृत राशि का उपयोग सीवान में मत्स्य पालन से संबंधित विभिन्न प्रमुख अवसंरचना घटकों के निर्माण, विकास और उन्नयन के लिए किया जाएगा। इनमें आधुनिक मछली पालन इकाइयाँ, मछली बीज उत्पादन केंद्र और हैचरी, मछली संग्रहण और लैंडिंग केंद्र, कोल्ड स्टोरेज (शीत भंडारण) और कोल्ड चेन (शीत श्रृंखला) सुविधाएँ, मछली प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाइयाँ, और आधुनिक मछली बाजार शामिल हैं। कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन जैसी सुविधाएँ मछली को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद करती हैं, जिससे व्यापारियों और किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। यह परियोजना परिवहन और विपणन प्रणालियों को मजबूत करने पर भी केंद्रित है, साथ ही जल संसाधनों के वैज्ञानिक और कुशल उपयोग के लिए सहायक सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
यह पहल बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए, विशेष रूप से सीवान में व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। MSMEs छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय होते हैं जो अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस परियोजना से मछली उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि होने और मत्स्य पालन पर निर्भर व्यक्तियों की आय और आजीविका में सुधार होने की उम्मीद है। यह परियोजना छोटे और सीमांत मछली किसानों, मत्स्य सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों, महिला समूहों और ग्रामीण युवाओं के लिए नई आजीविका और उद्यम के अवसर पैदा करेगी। जिले की मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला (उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करके, यह निवेश स्थानीय गाँवों और संबद्ध सेवाओं में समावेशी विकास का समर्थन करना चाहता है। हालांकि नौकरियों की सटीक संख्या निर्दिष्ट नहीं की गई थी, लेकिन इस परियोजना से उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और विपणन तक की पूरी मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला में असंख्य रोजगार और उद्यम के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
