बिहार सरकार ने कैमूर जिले में धार्मिक और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य केंद्र माँ मुंडेश्वरी धाम और अन्य ऐतिहासिक तथा प्राकृतिक स्थलों का विकास होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को इन महत्वपूर्ण विरासत स्थलों, जिनमें माँ मुंडेश्वरी मंदिर परिसर भी शामिल है, के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन और एकीकृत विकास के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया है।
यह कदम कैमूर जिले की पर्यटन क्षमता को उजागर करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। सरकार का उद्देश्य इन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाना है, जिससे क्षेत्र में पर्यटकों की आमद बढ़े। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से स्थानीय छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। उदाहरण के लिए, होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन सेवाएं, हस्तशिल्प की दुकानें और गाइड सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसर भी पैदा करेगा, जिससे उनकी आय में सुधार होगा।
इस विकास योजना के तहत, सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में एक वैज्ञानिक अभ्यास शुरू किया गया है। यह अभ्यास इन स्थलों की ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को समझने और उनके संरक्षण के लिए सर्वोत्तम तरीकों को निर्धारित करने में मदद करेगा। वैज्ञानिक सर्वेक्षण और उत्खनन से छिपी हुई जानकारियाँ सामने आ सकती हैं, जो इन स्थलों को और अधिक आकर्षक बनाएंगी। एकीकृत विकास का अर्थ है कि इन स्थलों को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि पर्यटकों के लिए सुविधाएं जैसे बेहतर सड़कें, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि कैमूर बिहार के पर्यटन क्षेत्र में एक प्रमुख गंतव्य बन सके। यह पहल न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करेगी बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
