मोतिहारी केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर निर्माण लागत ₹488.83 करोड़ बढ़ी; CAG ने अनियमितताओं पर उठाए सवाल

ThisNews Desk
मोतिहारी केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर निर्माण लागत ₹488.83 करोड़ बढ़ी; CAG ने अनियमितताओं पर उठाए सवाल
चित्र: William Gevorg Urban / Pexels

बिहार के मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCU) के स्थायी परिसर के निर्माण की लागत में छह महीने के भीतर लगभग ₹488.83 करोड़ की भारी वृद्धि हुई है। प्रारंभिक अनुमान ₹850 करोड़ से बढ़कर अब यह ₹1,338.83 करोड़ हो गया है, जो परियोजना की लागत में लगभग 58% की वृद्धि दर्शाता है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अप्रैल 2023 से मार्च 2025 तक की अपनी ऑडिट रिपोर्ट में इस परियोजना से संबंधित कई खामियों को उजागर किया है। इनमें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप देने में देरी, दस्तावेज़ों का अभाव, निविदा प्रक्रियाओं का उल्लंघन और कार्यक्रमों के बिलों में वृद्धि शामिल है। CAG की रिपोर्ट में ₹8.17 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएं और अधिक भुगतान भी पाए गए हैं। यह रिपोर्ट 13 सितंबर, 2026 के आसपास प्रकाशित हुई थी।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना 2014 में संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने परामर्श के बाद ₹1,338.83 करोड़ का संशोधित लागत अनुमान तैयार किया था, जिसे बाद में वैधानिक निकायों द्वारा पारित कर शिक्षा मंत्रालय को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया। विश्वविद्यालय के आधिकारिक प्रवक्ता, प्रोफेसर प्रसून दत्ता सिंह ने स्पष्ट किया है कि ये "प्रारंभिक ऑडिट टिप्पणियां हैं, अंतिम निष्कर्ष नहीं"। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अप्रैल 2026 में ऑडिट अधिकारियों को दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ 256 पृष्ठों का विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया था। वर्तमान में, विश्वविद्यालय मोतिहारी में चार अस्थायी स्थानों से संचालित हो रहा है।

यह लागत वृद्धि और उजागर की गई खामियां बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। सार्वजनिक धन के उपयोग में ऐसी वित्तीय अनियमितताएं और लागत में वृद्धि दक्षता और वित्तीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाती हैं। परियोजना के पूरा होने में देरी से विश्वविद्यालय के पूर्ण संचालन में बाधा आ सकती है, जिससे स्थानीय व्यवसायों को मिलने वाले लाभ प्रभावित होंगे। निविदा उल्लंघनों और पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे नैतिक व्यवसायों को सार्वजनिक परियोजनाओं में भाग लेने से हतोत्साहित कर सकते हैं। बिहार के लिए व्यापक CAG रिपोर्टों में लगातार प्रणालीगत वित्तीय प्रबंधन चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें 31 मार्च, 2025 तक ₹92,133 करोड़ के लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र शामिल हैं, जिसमें से ₹19,097 करोड़ शिक्षा विभाग से संबंधित हैं। यह जवाबदेही का एक व्यापक मुद्दा है जो सभी आर्थिक क्षेत्रों को प्रभावित करता है।

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